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    11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद करने की मांग पर झारखंड हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों से मांगा जवाब

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 07:17 PM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा परिणाम रद्द करने की मांग वाली अपील पर सुनवाई की। खंडपीठ ने अनुशंसित एवं नियुक्त अ ...और पढ़ें

    जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा परिणाम चुनौती पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब।

    जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा परिणाम चुनौती पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने जेपीएससी परीक्षा परिणाम चुनौती पर सुनवाई की।

    2. अनुशंसित अभ्यर्थियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

    3. अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद करने की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर सोमवार को सुनवाई हुई।

    सुनवाई के बाद खंडपीठ ने मामले में अनुशंसित एवं नियुक्त अभ्यर्थियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है। यह अपील अयूब तिर्की एवं अन्य की ओर से दायर की गई है।

    सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा। इससे पहले खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता को निर्देश दिया था कि परीक्षा में सफल 342 अभ्यर्थियों, जिन्हें नियुक्ति पत्र मिल चुका है, को मामले में प्रतिवादी बनाया जाए।

    अदालत ने कहा था कि अपील पर आने वाले अंतिम फैसले का सीधा असर सफल अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है। इसी कारण उन्हें पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है। बताते चलें कि जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 में 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मुख्य परीक्षा के परिणाम को रद करने की मांग वाली रिट याचिका खारिज कर दी थी।

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    अयूब तिर्की और राजेश कुमार की ओर से दायर याचिका में परीक्षा के मूल्यांकन में गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां समय पर नहीं उठाई गई थीं।

    अदालत को मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसी कोई गंभीर खामी नहीं मिली, जिसके आधार पर पूरी परीक्षा का परिणाम रद किया जा सके। इसके बाद अदालत ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया था।