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देवघर  AIIMS को सुविधाएं देने में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, झारखंड सरकार से मांगा जवाब

Published: Thu, 03 Sep 2026 07:56 PM (IST)

उच्च न्यायालय ने देवघर एम्स को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने एम्स और ...और पढ़ें

सरकार से पूछा- अब तक कौन-कौन सी सुविधाएं दी गई।

सरकार से पूछा- अब तक कौन-कौन सी सुविधाएं दी गई।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने देवघर एम्स सुविधाओं पर सरकार से जवाब मांगा।

  2. एम्स को जमीन, पानी, अग्निशमन जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं।

  3. अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी, सांसद ने याचिका दायर की।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में देवघर एम्स को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में देवघर एम्स और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने दोनों पक्षों से प्रार्थी की ओर से उठाई गई मांगों पर समय-सीमा के साथ जवाब दाखिल करने को कहा है। जवाब में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि एम्स को कौन-कौन सी सुविधाएं कब तक उपलब्ध करा दी जाएंगी। अदालत ने तिथि वार अद्यतन जानकारी देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान पूर्व में देवघर एम्स की ओर से अदालत को बताया गया था कि राज्य सरकार ने एम्स के लिए अब तक पूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई है। एम्स के लिए कुल 170 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन अभी तक करीब 150 एकड़ जमीन ही उपलब्ध कराई गई है। करीब 20 एकड़ जमीन अब भी उपलब्ध कराया जाना बाकी है।

एम्स की ओर से यह भी बताया गया था कि पुनासी डैम से पानी की आपूर्ति की जानी थी, लेकिन अब तक इसकी व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसके अलावा एम्स में फायर फाइटिंग उपकरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

एम्स के कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए केंद्रीय विद्यालय खोलने की बात भी कही गई थी, लेकिन इस दिशा में भी अब तक आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। एम्स की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली अन्य कई मूलभूत सुविधाएं भी अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।

इसके कारण एम्स के संचालन में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि इस संबंध में सांसद निशिकांत दुबे की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।