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    झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विज्ञान स्ट्रीम में BCA की डिग्री भी होगी मान्य; अब नियुक्ति से नहीं रोक सकता JSSC  

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 09:39 AM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने बीसीए डिग्री को विज्ञान स्ट्रीम के तहत मान्य किया है, राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का आदेश ...और पढ़ें

    झारखंड हाई कोर्ट ने बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम माना।

    झारखंड हाई कोर्ट ने बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम माना।

    HighLights

    1. झारखंड हाई कोर्ट ने बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम माना।

    2. राज्य सरकार की अपील खारिज, नियुक्ति का आदेश।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि बैचलर आफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (बीसीए) की डिग्री विज्ञान स्ट्रीम के अंतर्गत आती है।

    अदालत ने राज्य सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जिनमें बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम में नहीं माना गया था और शिक्षक पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

    पीठ ने दो याचिकाकर्ता अभिजीत कुमार सिन्हा और मुकेश रंजन के पक्ष में फैसला सुनाया। दोनों याचिकाकर्ताओं ने बीसीए डिग्री प्राप्त की थी और उन्हें प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (शारीरिक शिक्षा) के पद के लिए चयनित किया गया था, लेकिन जेएसएससी ने उनकी डिग्री को विज्ञान स्ट्रीम की नहीं मानते हुए नियुक्ति से वंचित कर दिया था। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा।

    अदालत ने अपने आदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की वर्ष 2014 की अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम में सूचीबद्ध किया गया है।

    कोर्ट ने कहा कि 2014 की अधिसूचना केवल स्पष्टीकरण है, न कि कोई नया प्रविधान। इसलिए, यह पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होगी, भले ही याचिकाकर्ताओं ने 2014 से पहले डिग्री प्राप्त की हो। पीठ ने कहा कि 2014 अधिसूचना का पहला भाग स्पष्ट रूप से बताता है कि जानकारी स्पष्टता के लिए सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत की गई है।

    इसका अर्थ है कि बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम में रखना कोई नया बदलाव नहीं, बल्कि पहले से विद्यमान स्थिति का स्पष्टीकरण मात्र है। अदालत ने यह भी कहा कि बीसीए डिग्री को यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 22 के तहत 2009 में ही मान्यता दी जा चुकी थी, और 2014 के अधिसूचना ने केवल उसके स्ट्रीम को स्पष्ट किया है।

    राज्य सरकार का पक्ष खारिज

    राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का तर्क था कि चूंकि याचिकाकर्ताओं ने 2014 से पहले बीसीए की डिग्री प्राप्त की थी, इसलिए वह विज्ञान स्ट्रीम में नहीं आती। अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अधिसूचना की भाषा स्पष्ट है और यह केवल स्पष्टीकरण है, इसलिए यह पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी।

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    कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्पष्टीकरण कानून पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने 12वीं की पढ़ाई विज्ञान स्ट्रीम से किया था, जिससे उनकी बीसीए डिग्री विज्ञान स्ट्रीम के अनुरूप है।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम की डिग्री माना जाएगा और राज्य सरकार या आयोग इस आधार पर किसी अभ्यर्थी की पात्रता पर सवाल नहीं उठा सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति दी जाए।