झारखंड में अमन-सुजीत जैसे बड़े गैंगस्टर मारे गए तो अपराधियों की 'नई पौध' उड़ा रही कारोबारियों की नींद
झारखंड में बड़े अपराधियों पर नकेल कसने के बावजूद छोटे व नए अपराधी रंगदारी मांगकर कारोबारियों को परेशान कर रहे ...और पढ़ें

झारखंड में रंगदारी का आतंक, छोटे अपराधी कर रहे कारोबारियों को परेशान।
HighLights
झारखंड में छोटे व नए अपराधी रंगदारी मांगकर दहशत फैला रहे हैं।
कारोबारियों से करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगी जा रही है।
पुलिस ने सात माह में 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में माओवादी घटनाएं थमने और लेवी वसूली पर नकेल कसने से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन छोटे व नए अपराधियों ने राज्य के कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद राज्य में रंगदारी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कहीं पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले सामने आ रहे हैं, तो कहीं एक लाख रुपये प्रति माह रंगदारी न देने पर खोपड़ी उड़ाने की धमकी दी जा रही है।
झारखंड पुलिस ने बड़े-बड़े गैंगस्टरों को तो घुटने टेकने पर विवश कर दिया, लेकिन अपराधियों की नई पौध ने दहशत कायम करने के लिए गोलीबारी तक की है और वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को डराना-धमकाना जारी रखा है।
बचे हुए बड़े अपराधी जेल में, छोटे मचा रहे आतंक
वर्तमान में बचे हुए बड़े अपराधी अब जेल में हैं, लेकिन छोटे आतंक कायम किए हुए हैं। कभी कुख्यात रहे अनिल शर्मा, विकास तिवारी व अखिलेश सिंह जैसे अपराधी हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं। जो बचे हुए हैं, वे आतंक कायम करने के लिए तरह-तरह का हथकंडा अपना रहे हैं। नए-नए नाम से गिरोह बनाकर रंगदारी मांग रहे हैं।
हाल के दिनों में रांची में हटिया के चांदनी चौक स्थित शराब दुकान के संचालक उमाशंकर सिंह से वाट्सएप काल व मैसेज पर पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने, हरमू हाउसिंग कालोनी के होटल कारोबारी शशिकांत शर्मा उर्फ डब्लू शर्मा से वाट्सएप काल पर एक लाख रुपये प्रतिमाह रंगदारी मांगने और नहीं देने पर खोपड़ी खोलने संबंधित काल आ चुके हैं।
डब्लू शमा से रंगदारी मांगने वाले ने अपना नाम रूद्रा बताया था। इसी तरह रांची के कांके निवासी कारोबारी आशुतोष कुमार सिंह से भी अपराधियों द्वारा दो करोड़ रुपये की रंगदारी नहीं देने पर जान मारने की धमकी मिल चुकी है।
सात महीने में 193 अपराधी गिरफ्तार, 50 पर सीसीए के तहत कार्रवाई
झारखंड पुलिस ने ऐसे अपराधियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई भी की है। इस वर्ष एक जनवरी से 31 जुलाई तक यानी सात महीने में संगठित आपराधिक गिरोह के 193 अपराधियों काके गिरफ्तार भी किया।
उनकी निशानदेही पर 63 हथियार व 274 कारतूस की बरामदगी भी की। इतना ही नहीं, जेल से छूटने वाले संगठित आपराधिक गिरोह के 50 अपराधियों पर सीसीए के तहत कार्रवाई भी की है, ताकि वे जेल से बाहर नहीं आ सकें।
ये हैं कुछ कुख्यात अपराधी, जिनका मिट चुका है नामो निशान
- भोमा सिंह : संगठित बिहार में 22 जनवरी 1999 को रांची के तत्कालीन बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में कुख्यात अपराधी सुधीर सिंह उर्फ भोमा सिंह की कुख्यात अपराधी व प्रतिद्वंद्वी अनिल शर्मा ने दाढ़ी बनाने वाले अस्तुरा से गला रेतकर हत्या कर दी थी। दोनों ही अपराधी जेल में बंद थे। भोमा सिंह उस वक्त कुख्यात अपराधी सुरेंद्र सिंह रौतेला उर्फ सुरेंद्र बंगाली का सक्रिय सदस्य था।
- भोला पांडेय : भोला पांडेय पांडेय गिरोह का सरगना था। कोयलांचल में उसका सिक्का चलता था। वर्ष 2009 में दुमका जेल से रांची लाने के क्रम में जामताड़ा में पुलिस वैन रुकी और भोला पांडेय शौच के लिए उतरा ही था कि अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर भोला पांडेय को मौत के घाट उतार दिया था। आरोप भोला पांडेय के प्रतिद्वंद्वी अपराधी सुशील श्रीवास्तव गिरोह पर लगा था।
- किशोर पांडेय : पांडेय गिरोह के सरगना भोला पांडेय के मारे जाने के बाद उसके भतीजे किशोर पांडेय ने गिरोह की कमान संभाली और कम समय में ही अपना दबदबा कायम कर लिया। कुख्यात अपराधी किशोर पांडेय को भी उसके प्रतिद्वंद्वी सुशील श्रीवास्तव गिरोह ने 15 अक्टूबर 2014 को जमशेदपुर के कदमा बाजार में ताबड़तोड़ फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया था। उसमें किशोर पांडेय का सहयोगी भी मारा गया था।
- सुशील श्रीवास्तव : पांडेय गिरोह का प्रतिद्वंद्वी श्रीवास्तव गिरोह के सरगना सुशील श्रीवास्तव को दो जून 2015 को हजारीबाग सिविल काेर्ट परिसर में अपराधियों ने एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया था। इसे पांडेय गिरोह के भोला पांडेय व किशोर पांडेय की हत्या का बदला बताया गया था। हत्या का आरोप विकास तिवारी पर लगा था। इस मामले में विकास तिवारी को आजीवन कारावास की सजा हुई है।
- मनोज सिंह : गैंगस्टर अखिलेश सिंह गिरोह के सदस्य मनोज सिंह की 25 जून 2019 को जमशेदपुर स्थित घाघीडीह सेंट्रल जेल में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप जेल में बंद प्रतिद्वंद्वी के विरुद्ध लगा था।
- कुणाल सिंह : पलामू में गैंगस्टर कुणाल सिंह की 3 जून 2020 को फिल्मी तरीके से हत्या की गई थी। प्रतिद्वंद्वियों ने पहले कार में टक्कर मारकर रोका और फिर मोटरसाइकिल से पहुंचे शूटरों ने उसकी हत्या कर दी। हत्या का आरोप डब्लू सिंह गिरोह पर लगा था।
- अमन सिंह : गैंगस्टर अमन सिंह की धनबाद मंडल कारा में तीन दिसंबर 2025 को हत्या हुई थी। जेल में हथियार पहुंचने व गोली चलने की यह घटना तब चर्चा में आई थी। अपराधी अमन सिंह धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की वर्ष 2017 में हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था। अमन सिंह के हत्यारों का उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर भी हो चुका है।
- अमन साहू : बहुत कम समय में अपराध जगत में अमन साहू कुख्यात हो गया था। बड़े हथियारों के साथ इंटरनेट मीडिया पर फोटो पोस्ट कर अमन साहू ने कारोबारियों में दहशत कायम कर दिया था। रंगदारी नहीं देने पर गोली चलाना उसके लिए आम बात थी। वह केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार, छत्तीसगढ़ तक उसका खौफ था। बाद में पकड़ा गया था और 11 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ के रायपुर जेल से रांची लाने के क्रम में पलामू में पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया था।
- उत्तम यादव : झारखंड पुलिस ने 20 सितंबर 2025 को चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र में मुठभेड़ में कुख्यात उत्तम यादव को मार गिराया था। यह बिहार-झारखंड के लिए सिरदर्द बना हुआ था। यह भी हथियारों के साथ इंटरनेट मीडिया पर फोटो पोस्ट कर दहशत फैलाता था।
- सूर्या हांसदा : गोड्डा जिले के बोआरीजोर थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत से हथियार छीनकर भागने के दौरान 11 अगस्त 2025 को पुलिस से मुठभेड़ में अपराधी सूर्या हांसदा मारा गया था।
- सुजीत सिन्हा : सुजीत सिन्हा अमन साहू की तरह ही कुख्यात अपराधी था और हथियारों के साथ फोटो इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर रंगदारी वसूलता था। दहशत फैलाने के लिए गोलीबारी, आगजनी आदि की घटना काे अंजाम देता था। दो अगस्त 2026 को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा लाने के दौरान जामताड़ा में भागने के क्रम में पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया था।
