झारखंड में शिक्षा की बदहाल तस्वीर: 100 स्कूलों में जीरो छात्र, 9700 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे
झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति यू-डायस प्लस 2025-26 रिपोर्ट से उजागर हुई है। राज्य के 100 से अधिक ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड तस्वीर
HighLights
100 से अधिक स्कूलों में एक भी छात्र नहीं।
9700 से ज्यादा स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे।
1950 स्कूलों में बिजली, 500 में शौचालय का अभाव।
आदिल हसन, रांची। झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। शिक्षा विभाग की यू-डायस प्लस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम प्लस) 2025-26 रिपोर्ट के विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य के 44,311 स्कूलों में से 100 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, जबकि 9,700 से ज्यादा स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी बड़ी समस्या बना हुआ है। करीब 1,950 स्कूलों में बिजली नहीं, 500 से अधिक स्कूलों में शौचालय नहीं, और 670 से ज्यादा स्कूलों में पेयजल की सुविधा नहीं है। वहीं, 50 से अधिक स्कूल बिना भवन और 450 से अधिक स्कूल बिना क्लासरूम के संचालित हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अब भी खराब
गिरिडीह, रांची, पलामू जैसे जिलों में स्कूलों की संख्या अधिक है, लेकिन सुविधाओं में असमानता साफ दिखती है। वहीं दुमका, पाकुड़, साहिबगंज और लातेहार जैसे जिलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अधिक गंभीर है। शहरी जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अब भी खराब हैं।
एक शिक्षक पर पूरा स्कूल
करीब 10 हजार स्कूलों में एक ही शिक्षक होने की स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। ऐसे स्कूलों में एक शिक्षक को कई कक्षाओं को एक साथ संभालना पड़ता है, जिससे बच्चों की बुनियादी पढ़ाई तक प्रभावित होती है। ग्रामीण और सुदूर इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर है।
भवन और कक्षाओं का संकट
रिपोर्ट के अनुसार, दर्जनों स्कूल आज भी बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। कई जगह बच्चे पेड़ के नीचे या अस्थायी शेड में पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं 450 से अधिक स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं, जिससे एक ही कमरे में कई कक्षाएं चलती हैं।
बिजली, पानी और शौचालय का अभाव
शिक्षा के अधिकार कानून के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। 1,950 स्कूलों में बिजली नहीं है। इस वजह से डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास की योजना प्रभावित हो रही हैं। 500 से अधिक स्कूलों में शौचालय नहीं है। इससे बालिकाओं की उपस्थिति पर असर पड़ रहा है। वहीं, 670 से स्कूलों में पेयजल की सुविधा नहीं है।
पिछड़े जिले, सबसे ज्यादा संकट
- दुमका (2,553 स्कूल): पानी और शौचालय की कमी
- पाकुड़ (1,145 स्कूल): संसाधनों की भारी कमी
- साहिबगंज (1,533 स्कूल): बुनियादी सुविधाओं का अभाव
- लातेहार (1,224 स्कूल): शिक्षक और भवन दोनों की कमीस अधिक स्कूल, लेकिन सुविधाओं का दबाव
- रांची (3,285 स्कूल): नामांकन सबसे ज्यादा, लेकिन कई स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी
- गिरिडीह (3,837 स्कूल): संख्या अधिक, संसाधनों का असमान वितरण
- पलामू (2,900 स्कूल): दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षक और सुविधा की कमी
- धनबाद (2,433 स्कूल): शहरी क्षेत्र बेहतर, ग्रामीण इलाकों में समस्याएं
- बोकारो (2,121 स्कूल): औद्योगिक जिला होने के बावजूद कई स्कूलों में कमी
- हजारीबाग (2,230 स्कूल): नामांकन अच्छा, लेकिन आधारभूत ढांचा कमजोर, आदिवासी और दूरदराज जिले सबसे प्रभावित
गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में शिक्षक की कमी सबसे अधिक है। स्कूलों में बिजली और पानी का अभाव है।
