जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक: कई अधिकारी रडार पर, 9 गिरफ्तार; 350 सफल अभ्यर्थियों से हो चुकी है पूछताछ
सीआईडी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा में अनियमितताओं की जांच कर रही है, जिसमें अब तक 350 सफल ...और पढ़ें

लगातार चल रही है पूछताछ, सत्यापन में दोषी मिलने पर ही हो रही है गिरफ्तारी।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) प्रतियोगिता परीक्षा में अनियमितता, पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच कर रही सीआइडी के रडार पर इस परीक्षा से नियुक्त सभी सफल अभ्यर्थी हैं, जो अब अधिकारी बन चुके हैं। सीआईडी एक-एक कर सबका बयान ले रही है।
पूरे मामले की जांच कर रही सीआइडी की एसआईटी ने मंगलवार को भी 25 सफल अभ्यर्थियों व संदिग्धों से पूछताछ की है। अब तक की छानबीन व पूछताछ में यह निकलकर सामने आ चुका है कि जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा में सेटिंग से कई अभ्यर्थी पास भी हुए, प्रश्नपत्र लीक भी हुआ और सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को विभिन्न जगहों पर ले जाकर प्रश्न व उत्तर रटवाए भी गए।
आने वाले समय में कई और सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी भी होगी। एसआइटी ने जांच शुरू होने के बाद से अब तक सफल 1932 अभ्यर्थियों में से 350 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ पूरी कर ली है। कई संदिग्धों से भी पूछताछ हो चुकी है। सत्यापन में दोषी मिलने वाले अभ्यर्थियों, संदिग्धों की गिरफ्तारी भी होती जा रही है।
एसआईटी ने हाल के दिनों में नौ अभ्यर्थी, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के दो कर्मी व एक दलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। कई संदिग्धों के विरुद्ध जांच व सत्यापन जारी है। बहुत जल्द ही गिरफ्तार आरोपितों को रिमांड पर लेकर भी सीआइडी पूछताछ करेगी।
ये हैं नौ सफल अभ्यर्थी जिन्हें CID ने किया है गिरफ्तार
मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी, भाई अक्षय तिवारी, दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह, समीर कुमार व कुंदन कुमार।
- ये हैं परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के दोनों गिरफ्तार कर्मी: सोमांश प्रकाश व राहुल कुमार।
- गिरफ्तार दलाल, जो अभ्यर्थियों को साठगांठ से कराता था पास: दलाल राजन कुमार
मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद सिंडिकेट के अन्य साथियों का खुलेगा राज
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक हुआ था, इसका खुलासा गिरफ्तार अभ्यर्थियों से पूछताछ में हो चुका है। इस परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी वेबेल एजेंसी को दी गई थी। वेबेल ने अपनी सहयोगी एजेंसी आइसीएन को परीक्षा संचालन के कार्य में लगाया था।
इसी आइसीएन एजेंसी ने पेपर लीक, सेटिंग, अनियमितता व रुपये लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने की साजिश रची। यह खुलासा हो चुका है कि 12 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक में परीक्षा पास कराने की साजिश रची गई थी। अब मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद पेपर लीक सिंडिकेट के अन्य साथियों की जानकारी सामने आएगी।
