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झारखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकेगा AI: तीन जिलों में लगे सर्विलांस टावर; जानवरों का मिलेगा रीयल-टाइम अलर्ट

Updated: Mon, 17 Aug 2026 03:21 AM (IST)

झारखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने एआई आधारित सर्विलांस टावर लगाए हैं। ये टावर हाथियों और तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों का रियल-टाइम अलर्ट भेजकर जान-माल का नुकसान रोकेंगे।

विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत रामगढ़, दलमा और पलामू क्षेत्र में तीन नए AI आधारित सर्विलांस टावर स्थापित किए हैं।

विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत रामगढ़, दलमा और पलामू क्षेत्र में तीन नए AI आधारित सर्विलांस टावर स्थापित किए हैं।

HighLights

  1. एआई आधारित सर्विलांस टावर रामगढ़, दलमा, पलामू में स्थापित।

  2. वन्यजीवों की गतिविधियों का रियल-टाइम अलर्ट कमांड सेंटर को।

  3. मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी लाने में सहायक होगा।

राज्‍य ब्‍यूरो, रांची। झारखंड में बारिश के मौसम के बाद मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं में बढ़ोतरी हो जाती है।
 
जंगलों में पानी भरने के कारण हाथी, तेंदुए और अन्य वन्यजीव भोजन व सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करते हैं। 
 
जिससे अक्सर जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का सहारा लिया है।
 

पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन क्षेत्रों में लगे टावर

विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत रामगढ़, दलमा और पलामू क्षेत्र में तीन नए AI आधारित सर्विलांस टावर स्थापित किए हैं। इससे पहले थर्मल इमेजिंग तकनीक से केवल जीवों की एकसमान छवियां ही मिलती थीं।
 
लेकिन नई AI तकनीक जानवरों के आकार और बनावट के आधार पर उनका सटीक वर्गीकरण (हाथी, तेंदुआ, हिरण आदि) करने में सक्षम है।
 
इन टावरों में ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम लगा है जो वन्यजीवों की गतिविधि दर्ज होते ही सीधे कमांड सेंटर को रीयल-टाइम अलर्ट भेजेगा।
 
इससे वन विभाग की टीम त्वरित कार्रवाई कर सकेगी और स्थानीय ग्रामीणों को भी समय रहते सतर्क किया जा सकेगा। 
 
पलामू जैसे क्षेत्रों में, जहाँ तेंदुए के हमले की घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं, यह तकनीक बेहद कारगर साबित होगी।
 

सालाना 100 से अधिक लोग गंवाते हैं जान

झारखंड में वन्यजीवों के हमलों के कारण प्रतिवर्ष औसतन 100 लोगों की मौत हो जाती है; कुछ वर्षों में यह आंकड़ा 130 तक भी पहुेचा है। 
 
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम टास्क फोर्स से जुड़े शहजादा अनवर ने बताया कि हाथियों के मूवमेंट को ट्रैक करने में उत्तराखंड ने AI मॉडल अपनाकर मौतों के आंकड़ों में 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की है। झारखंड में भी इस तकनीक से सीमावर्ती ग्रामीणों को सुरक्षा मिलेगी।


आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पूरे राज्य में विस्तार

मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एसआर नटेश ने बताया कि मानसून के बाद इन तीनों टावरों से प्राप्त आंकड़ों और इनपुट्स का विश्लेषण अन्य स्रोतों से मिले डाटा के साथ किया जाएगा। 
 
नतीजों की समीक्षा के बाद राज्य के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी ऐसे AI सर्विलांस टावर लगाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विभाग की प्राथमिकता ग्रामीण आबादी और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।