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    डॉ. एके पांडा के नेतृत्व में SAIL का नया अध्याय, 35 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य; बोकारो से राउरकेला तक स्टील को रफ्तार

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 08:00 AM (IST)

    डॉ. अशोक कुमार पांडा ने सेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक का पदभार संभाला है, जिनके पास कंपनी में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उनकी प्राथमिकताओं में 35 ...और पढ़ें

    सेल की कमान डाॅ. एके पांडा के हाथ।

    सेल की कमान डाॅ. एके पांडा के हाथ।

    HighLights

    1. डॉ. अशोक कुमार पांडा ने सेल सीएमडी का पदभार संभाला।

    2. 35 मिलियन टन उत्पादन क्षमता विस्तार प्रमुख प्राथमिकता।

    3. सुरक्षा और खनिज खोज पर भी रहेगा विशेष जोर।

    जागरण संवाददाता, रांची। देश में सड़क, रेलवे, पुल, आवास और औद्योगिक परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है, तो स्टील की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे समय में स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की कमान अब ऐसे अधिकारी के हाथ में है, जिन्होंने कंपनी में ही अपने करियर की शुरुआत की और तीन दशक से अधिक समय तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।

    डाॅ. अशोक कुमार पांडा ने नौ मई को सेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का पदभार संभाल लिया है। झारखंड के लोगों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। राज्य में सेल का बोकारो स्टील प्लांट हजारों परिवारों की आजीविका, स्थानीय कारोबार और आसपास की अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा है।

    वहीं पड़ोसी ओडिशा का राउरकेला स्टील प्लांट भी झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों पर असर डालता है। ऐसे में सेल की उत्पादन और विस्तार नीति का असर पूर्वी भारत के औद्योगिक परिदृश्य पर भी दिखाई दे सकता है।

    35 मिलियन टन उत्पादन की तैयारी

    सीएमडी बनने के बाद डाॅ. पांडा ने सेल के लिए 35 मिलियन टन प्रति वर्ष(एमटीपीए) क्षमता विस्तार को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। उनका कहना है कि क्षमता बढ़ाने के साथ सभी कार्यस्थलों पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

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    इसके अलावा घरेलू खनन और खनिज खोज को मजबूत करने तथा विदेशों में कच्चे माल की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर रहेगा। डॉ. पांडा ने 1992 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई करने के बाद सेल में मैनेजमेंट ट्रेनी (टेक्निकल) के रूप में शुरुआत की थी।

    वह निदेशक (वित्त) के साथ करीब नौ महीने तक निदेशक (वाणिज्यिक) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल चुके हैं। उनके कार्यकाल में उत्पादन बढ़ाने, बेहतर उत्पाद तैयार करने, बिक्री मजबूत करने और स्टाक कम करने जैसी रणनीतियों पर काम हुआ।