JPSC PT रिजल्ट 2026 पर भाजपा-आजसू ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग
भाजपा और आजसू ने जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी परीक्षा परिणाम रद कर सीबीआई जांच की मांग की है। कटऑफ जारी न होने, मेरिट सूची पर हस्ताक्षर न होने और ओए ...और पढ़ें

बीजेपी नेता। फोटो जागरण
HighLights
जेपीएससी 14वीं पीटी परिणाम रद्द कर सीबीआई जांच की मांग।
कटऑफ जारी न होने, मेरिट सूची पर हस्ताक्षर न होने पर सवाल।
ओएमआर शीट में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे।
राज्य ब्यूरो, रांची। भारतीय जनता पार्टी ने जेपीएससी 14वीं सिविल सर्विस पीटी का रिजल्ट रद करने और इसकी CBI जांच की मांग की है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि एक ओर सिविल सेवा परीक्षा में 103 पदों के लिए 2204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया जाता है, लेकिन कटऑफ तक जारी नहीं किया गया।
जेपीएससी के तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर तक नहीं होने से मेरिट सूची पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। दूसरी ओर बैकलाग पीटी परीक्षा में 832 अभ्यर्थियों का एक साथ कोई अता-पता नहीं रहता, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है। यह सामान्य प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ किया जा रहा क्रूर मजाक है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि ओएमआर शीट में भी बड़े पैमाने पर धांधली की खबरें आ रही है। उन्होंने एक ओएमआर शीट दिखाते हुए बताया कि इस परीक्षार्थी को पहले प्रश्न पत्र में 100 में से 48 नंबर आए हैं। दूसरे पेपर में उसे 97/100 आना चाहिए सफल होने के लिए। परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह संभव ही नहीं है। इसलिए पूरी परीक्षा जो है, वह संदेह के घेरे में है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हालिया विवादित परीक्षाओं और परिणामों की भी सीबीआई जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। प्रतुल शाहदेव ने राज्य के सभी प्रतियोगी छात्रों से अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक परीक्षा या एक बैच की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है।
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आजसू ने भी की जांच की मांग
अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते कहा कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार गंभीर सवालों के घेरे में है। जेपीएससी की हालिया प्रतियोगी परीक्षाओं एवं उनके परिणामों ने लाखों अभ्यर्थियों के मन में गहरा अविश्वास पैदा किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जेपीएससी योग्यता और निष्पक्ष चयन का माध्यम बनने के बजाय अव्यवस्था, अपारदर्शिता और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का प्रतीक बनता जा रहा है। हालिया सिविल सेवा परीक्षा में 103 पदों के विरुद्ध 2204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया गया, लेकिन आज तक कटआफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए। इतना ही नहीं, मेरिट सूची पर आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर तक नहीं होने से पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
इसी प्रकार बैकलाग पीटी परीक्षा में 832 अभ्यर्थियों का रिकार्ड स्पष्ट नहीं होने से पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। यह कोई सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ किया जा रहा गंभीर अन्याय है। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाएं अब प्रतिभा की नहीं, बल्कि अनिश्चितता, भ्रम और मानसिक प्रताड़ना की परीक्षा बन गई हैं।
वर्षों तक परीक्षाएं आयोजित नहीं होतीं और जब परिणाम आते हैं तो वे विवादों में घिर जाते हैं। कभी मॉडल उत्तर-पुस्तिका पर सवाल उठते हैं, कभी कटआफ सार्वजनिक नहीं किया जाता, कभी मेरिट सूची पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं होते और कभी अभ्यर्थियों के रिकार्ड ही संदिग्ध हो जाते हैं। ओएमआर शीट के मूल्यांकन में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें किसी अभ्यर्थी को प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से 48 अंक प्राप्त हुए, जबकि सफल होने के लिए दूसरे प्रश्नपत्र में 100 में से 97 अंक प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति असामान्य और संदेहास्पद है। इससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए आजसू ने मांग की है कि जेपीएससी की हालिया पीटी परीक्षा प्रक्रिया एवं हालिया विवादित परिणामों की सीबीआइ जांच कराई जाए। सभी परीक्षाओं के कटआफ, मेरिट निर्धारण की प्रक्रिया, मूल्यांकन प्रणाली एवं ओएमआर मूल्यांकन का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। राज्य के सभी प्रतियोगी छात्रों से अपील है कि यह संघर्ष किसी एक परीक्षा या एक बैच का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों का प्रश्न है।