‘मौत का हाईवे’ बना बारलोंग-बुधबाजार मार्ग, 3 दिनों में 11 मौतें; अब DC की पहल से बदलेगी सूरत
रजरप्पा के बारलोंग में तीन दिनों में 11 सड़क दुर्घटना मौतों से मातम छा गया है, जिससे प्रशासन पर सवाल उठे हैं। उपायुक्त की पहल पर अब सड़क पर स्ट्रीट ला ...और पढ़ें

डीसी के निर्देश के बाद कार्य मे जुटे थाना प्रभारी व मौजूद अन्य। (जागरण)
HighLights
बारलोंग में तीन दिनों में 11 सड़क दुर्घटनाओं में मौतें।
उपायुक्त की पहल पर सड़क सुरक्षा उपाय युद्धस्तर पर शुरू।
रजरप्पा पुलिस ने पीड़ित परिवारों को निजी खर्च से मदद दी।
तारकेश्वर महतो, रजरप्पा (रामगढ़)। रजरप्पा थाना क्षेत्र के बारलोंग इलाका पिछले तीन दिनों से मातम में डूबा है। लगातार सड़क हादसों में 11 लोगों की मौत ने हर घर को झकझोर दिया।
सबसे खौफनाक मंजर बारलोंग-बुधबाजार मार्ग पर दिखा, जहां तेज रफ्तार बेकाबू ट्रक ने मजदूरों से भरी सवारी गाड़ी को रौंद दिया।
टक्कर इतनी भीषण थी कि 8 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गैस कटर से गाड़ी काटकर शव निकाले गए। इन तीन दिनों में 11 जिंदगियां खत्म हो गईं। किसी घर से दो सगे भाइयों की अर्थी एक साथ उठी। किसी मासूम के सिर से पिता का साया छिन गया।
किसी की शादी को महीना भी नहीं बीता था। किसी के आंगन में अगले महीने बेटी की डोली उठनी थी। हादसों ने सब सपने चकनाचूर कर दिए। बारलोंग की पहचान अब 'मौत का हाईवे' बन गई थी।
11 मौतों ने प्रशासन को जगाया
लगातार हो रही मौतों के बाद जिला प्रशासन नींद से जागा है। उपायुक्त की पहल पर बारलोंग एवं बुध बाजार को सुधारने का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है।
डीसी के निर्देश पर सबसे पहले सड़क पर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा रही हैं ताकि रात में विजिबिलिटी बढ़े। सड़क के बीच पक्का डिवाइडर बनाया जा रहा है, जिससे आमने-सामने की टक्कर रुके।
सबसे अहम, ब्लाइंड स्पॉट खत्म करने के लिए सड़क का चौड़ीकरण शुरू हो गया है। साथ ही स्पीड ब्रेकर, साइनेज और रिफ्लेक्टर लगाने का काम भी चल रहा है। मकसद एक ही है कि आने वाले दिनों में बारलोंग में कोई और घर न उजड़े।
पुलिस बनी हमदर्द
रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार ने बताया की हमारी टीम 24 घंटे अलर्ट है। हादसे रोकने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को अपने निजी खर्च से 5 बोरा चावल, 10 किलो दाल और दो-दो सेट कपड़े भी दिए। उनका कहना है, 'वर्दी का फर्ज सिर्फ जांच करना नहीं, दुख में साथ खड़ा होना भी है।'
क्या सिर्फ हादसे के बाद ही जागेगा तंत्र
बारलोंग में 3 दिन में 11 मौतें सिस्टम पर बड़ा सवाल हैं। ओवरलोड ट्रक, तेज रफ्तार और खराब सड़क डिजाइन पहले से जानलेवा थे।
अब डीसी की पहल से लाइट, डिवाइडर और चौड़ीकरण का काम शुरू होना उम्मीद जगाता है। लेकिन सवाल वही है कि क्या हर बार 11 लाशें गिरने के बाद ही प्रशासन जागेगा? अगर ये काम पहले होते तो शायद 11 घरों के चिराग न बुझते।
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अब जरूरी है कि काम कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे ताकि बारलोंग की पहचान 'एक्सीडेंटल जोन' से बदलकर 'सेफ जोन' बन सके।
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