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रांची-हजारीबाग के बीच घट जाएगी दूरी, चरही घाटी के एक्सीडेंट जोन को बाईपास करेगी नई फोरलेन सड़क

Published: Thu, 13 Aug 2026 03:04 PM (GMT+05:30)Updated: Thu, 13 Aug 2026 09:16 PM (GMT+05:30)

एनएचएआई चरही घाटी में लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से तीन किलोमीटर का नया फोरलेन बाईपास बनाएगा। यह बाईपास ...और पढ़ें

चरही घाटी में एनएचएआई बनाएगा तीन किलोमीटर का नया फोरलेन बाईपास।

चरही घाटी में एनएचएआई बनाएगा तीन किलोमीटर का नया फोरलेन बाईपास।

HighLights

  1. चरही घाटी में तीन किमी नया फोरलेन बाईपास बनेगा।

  2. लगभग 40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से होगा निर्माण।

  3. दुर्घटनाएं घटेंगी, रांची-हजारीबाग यात्रा समय कम होगा।

मनोज कुमार सिंह, लपंगा (रामगढ़)। हजारीबाग-रांची फोरलेन सड़क के सबसे खतरनाक हिस्सों में शामिल चरही घाटी के घुमावदार एक्सीडेंट जोन को बाईपास करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) करीब 40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ढाई से तीन किलोमीटर लंबी नई फोरलेन सड़क बनाने की तैयारी कर रहा है। इस बाईपास के निर्माण से चरही घाटी के घुमावदार और दुर्घटनाप्रवण हिस्से को पूरी तरह दरकिनार किया जा सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार, बाईपास निर्माण की टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कई बड़ी कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगस्त के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। करीब एक वर्ष में नई सड़क को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बनने से इस मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।

गलत एलाइनमेंट बना दुर्घटनाओं का कारण

हजारीबाग-रांची फोरलेन सड़क का निर्माण करीब 12 वर्ष पहले एनएचएआई की देखरेख में जीआर अग्रवाल कंपनी द्वारा किया गया था। फोरलेन बनने से रांची और हजारीबाग के बीच आवागमन सुगम हुआ, लेकिन सड़क के कुछ हिस्सों में तकनीकी खामियों, गलत एलाइनमेंट और डिजाइन संबंधी समस्याओं के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहा।

विशेष रूप से चुटुपालू घाटी के बाद चरही घाटी का घुमावदार और जोखिमभरा हिस्सा दुर्घटनाओं के लिए बदनाम हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कई वर्षों में यहां लगातार हादसे होते रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

एनएचएआई की ओर से दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पिछले वर्षों में सड़क मरम्मत, सुरक्षा उपायों और अन्य तकनीकी प्रयोगों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। इसके बाद स्थानीय लोगों की मांग और हजारीबाग सांसद मनीष कुमार जायसवाल के लगातार प्रयासों के बीच चरही घाटी के लिए वैकल्पिक बाईपास सड़क बनाने की योजना पर गंभीरता से काम शुरू हुआ।

सीधा और सुरक्षित होगा नया मार्ग

प्रस्तावित बाईपास पुराने खतरनाक घुमावों को पूरी तरह दरकिनार करेगा। इससे वाहनों को अपेक्षाकृत सीधा और सुरक्षित मार्ग मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ ही रांची-हजारीबाग के बीच आवागमन अधिक सुगम होगा।

स्थानीय लोग लंबे समय से चरही घाटी के खतरनाक हिस्से का स्थायी समाधान करने की मांग करते रहे हैं। बाईपास निर्माण की योजना सामने आने के बाद क्षेत्र में इसे लेकर उम्मीद बढ़ी है।

चुटुपालू में भी करीब पांच किमी नई सड़क

हजारीबाग सांसद मनीष कुमार जायसवाल ने बताया कि हजारीबाग-रांची फोरलेन सड़क पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर उन्होंने एनएचएआई से लेकर केंद्रीय मंत्रालय तक को अवगत कराया था।

उनके अनुसार, सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक वर्ष तक विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए। दिल्ली स्थित मंत्रालय के साथ लगातार संवाद के बाद एनएचएआई ने दुर्घटनाप्रवण हिस्सों के सुधार के लिए पहले चरण में काम शुरू करने का निर्णय लिया है।

सांसद के अनुसार, इस चरण में चुटुपालू घाटी के घुमावदार और ढलान वाले हिस्से को सीधा करने के लिए करीब पांच किलोमीटर नई सड़क बनाई जाएगी। इसी तरह चरही घाटी के घुमावदार हिस्से को भी सीधा किया जाएगा।

इससे दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि दनुआ-मनुआ घाटी के लिए भी जल्द वैकल्पिक समाधान निकाले जाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। सांसद ने कहा कि सड़क सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।

व्यापार और आवागमन को भी मिलेगा लाभ

हजारीबाग-रांची मार्ग झारखंड के महत्वपूर्ण सड़क कॉरिडोर में शामिल है। इस मार्ग पर सुरक्षित और आधुनिक सड़क व्यवस्था होने से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।

एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकता अब टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य को निर्धारित समय में पूरा करना है। चरही घाटी का प्रस्तावित बाईपास तैयार होने के बाद वर्षों से दुर्घटनाओं के लिए बदनाम यह हिस्सा सुरक्षित आवागमन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का गवाह बन सकता है।

चुटुपालू और चरही घाटी में एक साल तक हजारीबाग सांसद मनीष कुमार जयसवाल द्वारा कई प्रयास किए गए। आखिरकार मंत्रालय से बातचीत के बाद एनएचएआई ने फैसला लिया है कि पहले चरण में चुटुपालू के घुमावदार और ढलान वाले हिस्से को सीधा कर करीब पांच किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी। चरही घाटी को भी सीधा किया जाएगा। दनुआ-मनुआ घाटी के लिए भी जल्द विकल्प निकाले जाएंगे

—डॉ संजय सिंह, भाजपा नेता

चुटुपालू और चरही घाटी में घुमाव और ढलान की वजह से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। रात में तो और भी खतरा बढ़ जाता है। सांसद जी के प्रयास से अब सड़क सीधी होने वाली है, यह अच्छी खबर है। पांच किलोमीटर सड़क सीधी हो जाए तो हम ड्राइवरों को काफी राहत मिलेगी। उम्मीद है कि काम जल्दी शुरू होगा।सुरक्षा सबसे जरूरी है।

—पप्पू अग्रवाल, पैरालैक्स, होंडा शोरूम डीलर

सड़क के घुमावदार हिस्से की वजह से कई परिवारों ने अपने परिजन खोए हैं। लोग रात में इस रास्ते से निकलने से डरते थे। सभी लोगों के प्रयासों के बाद अब एनएचएआई सड़क को सीधा करने जा रहा है। करीब पांच किलोमीटर सड़क सीधी होने से दुर्घटनाएं कम होंगी। चरही घाटी का भी काम होगा तो पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। हम प्रशासन से जल्द काम शुरू करने की अपील करते हैं।

—संतोष यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष राष्ट्रीय जनता दल

हजारीबाग-रांची फोरलेन पर चुटुपालू और चरही घाटी लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए बदनाम रहे हैं। एनएचएआई ने सकारात्मक कदम उठाया है। घुमावदार और ढलान वाले हिस्से को सीधा करना सही दिशा में बड़ा फैसला है। जिसका हम रामगढ़ जिला वासी स्वागत करते हैं,सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

-सत्यजीत चौधरी, जिलाध्यक्ष, हिंदू जागरण मंच, रामगढ़