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मुबारकपुर मदरसा मान्यता धोखाधड़ी मामला: जामताड़ा के जज सहित 22 पर FIR

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:45 PM (IST)

UP Madrasa Recognition Scam: मुबारकपुर स्थित मदरसा जामिया नूरुल उलूम की मान्यता में कथित कूटरचना को लेकर 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

Jamtara की स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष रिजवान अहमद पर यूपी में प्राथमिकी। (प्रतीकात्मक फोटो)

Jamtara की स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष रिजवान अहमद पर यूपी में प्राथमिकी। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. मदरसा जामिया नूरुल उलूम की मान्यता में कूटरचना का आरोप।

  2. जामताड़ा लोक अदालत अध्यक्ष रिजवान अहमद पर भी FIR।

  3. कूटरचित भूमि अभिलेखों के उपयोग का मामला उजागर हुआ।

जागरण टीम, जामताड़ा/आजमगढ़। Madrasa forgery case उत्तर प्रदेश के मुबारकपुर स्थित मदरसा जामिया नूरुल उलूम की मान्यता से जुड़े भूमि और भवन के अभिलेखों में कथित कूटरचना के मामले में 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। नामजद लोगों में जामताड़ा की स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष रिजवान अहमद का नाम भी शामिल है।

बताया गया है कि उनका नाम मदरसे की प्रबंध समिति में सदस्य और आडिटर के रूप में दर्ज था। मामला मदरसे की आलिया स्तर की स्थायी मान्यता से जुड़ा है। मदरसा शिक्षा परिषद की जांच में वर्ष 1998 में मान्यता के लिए प्रस्तुत दान पत्र को लेकर सवाल उठे थे।

आरोप है कि मान्यता प्राप्त करने के लिए कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान मदरसा प्रबंधन से मूल दान पत्र और स्पष्टीकरण मांगा गया था।

जांच में सामने आया कि 20 जून 1997 के दान पत्र में मदरसे की भूमि मोहम्मदाबाद गोहना तहसील में दर्शाई गई थी, जबकि संबंधित भूमि आजमगढ़ में बताई गई। इसके बाद मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया।

जांच के दायरे में 1998 और 2024-25 की प्रबंध समितियां

प्राथमिकी में वर्ष 1998 की प्रबंध समिति के सदर अलहाज अफी अहमद, नायब सदर मो. तारिक, प्रबंधक-सचिव जहीन अहमद, नायब सचिव शहनवाज आलम, खजांची मो. हामिद, आडिटर रिजवान अहमद समेत अन्य सदस्यों के नाम शामिल हैं।

वहीं वर्ष 2024-25 की प्रबंध समिति के सदर अहमदुल्लाह, नायब सदर मो. साकिब, प्रबंधक-सचिव जहीन अहमद, उपसचिव शहनवाज आलम, खजांची मो. हामिद, आडिटर रिजवान अहमद समेत अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है।

पहले शिकायत, अब दर्ज हुई प्राथमिकी 

इस संबंध में रिजवान अहमद ने बताया कि वह वर्ष 2002 से झारखंड न्यायिक सेवा में हैं और सिमडेगा में जिला जज के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्तमान में जामताड़ा में स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष हैं। करीब सात-आठ वर्ष पहले उन्हें अखबार की कटिंग से मुबारकपुर के मुंशीपुरा स्थित जामिया नूरुल उलूम मदरसे के बारे में जानकारी हुई।

इसी दौरान पता चला कि मदरसे की प्रबंध समिति में उनका नाम आडिटर के पद पर दर्ज है। उन्होंने कहा कि उन्होंने तत्काल एसएसपी आजमगढ़ और मुबारकपुर थाने को प्रार्थनापत्र देकर नाम शामिल करने की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

उन्होंने समिति में अपना नाम दर्ज होने से अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एसएसपी और थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया था, उनके नाम और आईडी का गलत इस्तेमाल हुआ है। लेकिन पुलिस ने विवेचना में उनके आवेदन को ध्यान में नहीं रखा गया है, प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पूरी जांच करनी चाहिए थी।

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