Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गोपाल मैदान में महाजुटान: 6 राज्यों से आए आदिवासियों ने उठाई 9 बड़ी मांगें, जानिए क्या है सरना कोड का पूरा मामला

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 11:41 PM (GMT+05:30)

    विश्व आदिवासी दिवस पर जमशेदपुर के गोपाल मैदान में छह राज्यों के हजारों युवाओं ने अपनी पहचान व अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। उन्होंने सरना धर्म कोड ...और पढ़ें

    विश्‍व आदिवासी दिवस पर जमशेदपुर में ऐतिहासिक महाजुटान में युवाओं और बुद्धिजीवियों ने एकजुट होकर 9 सूत्रीय मांगें रखीं।

    विश्‍व आदिवासी दिवस पर जमशेदपुर में ऐतिहासिक महाजुटान में युवाओं और बुद्धिजीवियों ने एकजुट होकर 9 सूत्रीय मांगें रखीं।

    HighLights

    1. जमशेदपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर भव्य महासमारोह आयोजित।

    2. छह राज्यों के हजारों युवाओं ने अपनी पहचान व अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

    जासं, जमशेदपुर। माथे पर चंदन का तिलक, आंखों में नई सुबह की चमक और चेहरों पर प्राचीन संस्कृति की महक समेटे युवाओं की टोली जब पारंपरिक परिधानों में थिरकी, तो सदियों की सांस्कृतिक विरासत जीवंत हो उठी। 
     
    मौका था बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आदिवासी छात्र एकता के बैनर तले आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के भव्य महासमारोह का। 
     
    इस महाजुटान में झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम सहित छह राज्यों से हजारों छात्र-युवा जुटे और अपनी पहचान को पहचानो के नारे के साथ अधिकारों की रक्षा के लिए शिक्षा व संवैधानिक चेतना को मुख्य हथियार बनाने का संकल्प लिया।
     

    जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ेगी नई पीढ़ी

    समारोह के मुख्य वक्ता और ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य सह आदिवासी छात्र एकता के मुख्य संरक्षक जोसाई मार्डी ने कहा कि आदिवासी समाज ने कभी अन्याय के आगे घुटने नहीं टेके हैं। 
     
    वर्तमान दौर में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ भाषाई व संवैधानिक अधिकारों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है।
     
    उन्होंने नई पीढ़ी से आधुनिक शिक्षा, तकनीक और संविधान की शक्ति से लैस होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
     

    सरना कोड और भूमि अधिकारों के लिए उठी आवाज

    ऐतिहासिक महाजुटान में युवाओं और बुद्धिजीवियों ने एकजुट होकर 9 सूत्रीय मांगें रखीं। इसमें प्रकृति पूजकों के लिए सरना धर्म कोड को संवैधानिक मान्यता देने, अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण न करने तथा वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को सख्ती से लागू करने की मांग उठी। 
     
    इसके अलावा देश के सभी आदिवासी क्षेत्रों को पांचवीं अनुसूची के दायरे में लाने, बिना मेसा कानून के नगर निकाय चुनाव न कराने तथा असम में रहने वाले संताल, हो, मुंडा व उरांव समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने की मांग की गई।
     

    भाषा और नियोजन के संरक्षण पर जोर

    युवाओं ने लैंड बैंक नीति को रद्द करने और झारखंड के निजी क्षेत्रों में स्थानीय नियोजन विधेयक-2021 को लागू करने का आग्रह किया।
     
    सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु हो, मुंडारी, भूमिज और कुड़ुख भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) से उपजी परिस्थितियों पर ठोस निर्णय लेने की मांग उठाई गई।