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निदेशकों की समिति ने 15 मिनट में दी मंजूरी, टाटा स्टील ने सेबी को भेजी JFC बिक्री की आधिकारिक रिपोर्ट

Published: Fri, 14 Aug 2026 02:49 PM (IST)

टाटा स्टील लिमिटेड ने अपनी सहायक कंपनी जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (JFSPL) की 100% हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

बैठक महज 15 मिनट के भीतर यानी दोपहर 12:15 बजे सफलतापूर्वक संपन्न भी हो गई, जिसमें हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दी गई।

बैठक महज 15 मिनट के भीतर यानी दोपहर 12:15 बजे सफलतापूर्वक संपन्न भी हो गई, जिसमें हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दी गई।

HighLights

  1. टाटा स्टील ने जेएफएसपीएल की 100% हिस्सेदारी बेची।

  2. सेबी को सूचित किया गया, AIFF की मंजूरी बाकी।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील लिमिटेड ने अपनी सहायक कंपनी जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (JFSPL) के मालिकाना हक हस्तांतरण को लेकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को महत्वपूर्ण नियामक (Regulatory) सूचना भेजी है।

सेबी को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा गठित विशेष समिति की शुक्रवार को दोपहर ठीक 12:00 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। 
 
यह बैठक महज 15 मिनट के भीतर यानी दोपहर 12:15 बजे सफलतापूर्वक संपन्न भी हो गई, जिसमें हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दी गई।
 

कमेटी का गठन और त्वरित फैसला 

सेबी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस विनिवेश प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए टाटा स्टील के निदेशक मंडल ने 30 जुलाई को ही कमेटी ऑफ डायरेक्टर्स (निदेशकों की समिति) का गठन किया था। 
 
इस समिति को जेएफएसपीएल में कंपनी की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी देने का पूरा अधिकार सौंपा गया था।


यह पूरी प्रक्रिया सेबी (LODR) विनियम, 2015 के नियम 30 और 51 के कड़े अनुपालन के तहत की गई है। टाटा स्टील के कंपनी सचिव एवं मुख्य कानूनी अधिकारी पार्वतीसम कंचिनाधम ने इस दस्तावेज़ पर डिजिटल हस्ताक्षर कर देश के प्रमुख शेयर बाजारों (BSENSE) को भी सूचित किया है।

कारपोरेट गवर्नेंस और नॉन-रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन 

कंपनी ने रेगुलेटर को आश्वस्त किया है कि इस डील में कारपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता का पूरा ख्याल रखा गया है। चुंकि यह सौदा प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप से पूरी तरह बाहर के खरीदार (चर्चिल ब्रदर्स) के साथ हुआ है, इसलिए इसे स्पष्ट रूप से नॉन-रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (गैर-संबद्ध पक्ष लेनदेन) की श्रेणी में रखा गया है।

रेगुलेशन 37A और कानूनी प्रक्रिया 

नियामक सूचना के अनुसार, शेयरों का यह विनिवेश किसी भी स्कीम ऑफ अरेंजमेंट (विलय या डिमर्जर) का हिस्सा नहीं है। इसके चलते सेबी के रेगुलेशन 37A के प्रावधानों के तहत कोई जटिल प्रक्रिया आड़े नहीं आएगी।

दोनों पक्षों के बीच शेयर खरीद समझौते (SPA) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। अब केवल ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और अन्य संबंधित खेल नियामकों की अंतिम औपचारिक मंजूरी मिलना बाकी है, जिसके 31 अगस्त तक पूरा हो जाने की उम्मीद जताई गई है।