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    साइकिल पर 'भारत दर्शन': सुल्तानपुर का यह युवा 8 महीने से तय कर रहा है हजारों किमी का सफर

    Updated: Wed, 01 Apr 2026 11:28 PM (IST)

    सुल्तानपुर के ओम प्रकाश पाल पिछले आठ महीनों से साइकिल पर भारत दर्शन कर रहे हैं। 12 अगस्त को शुरू हुई यह यात्रा पर्यावरण संरक्षण और आत्मसाक्षात्कार के ...और पढ़ें

    भारत भ्रमण के लिए निकला उत्‍तरप्रदेश निवासी ओम प्रकाश पाल पहुंचा खड़गपुर।

    भारत भ्रमण के लिए निकला उत्‍तरप्रदेश निवासी ओम प्रकाश पाल पहुंचा खड़गपुर।

    HighLights

    1. पर्यावरण संरक्षण और आत्मसाक्षात्कार का संदेश।

    2. उत्तराखंड, नेपाल सहित कई धार्मिक स्थलों का भ्रमण।

    जागरण संवाददाता, खड़गपुर भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी में जहां लोग समय की कमी का रोना रोते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक नौजवान, ओम प्रकाश पाल ने शांति और आत्मसाक्षात्कार के लिए एक अलग ही रास्ता चुना है। 
     

    12 अगस्त से जारी है 'अनोखा' सफर 

    हाथ में राष्ट्रीय ध्वज और धार्मिक पताका लिए ओम प्रकाश पिछले आठ महीनों से साइकिल के जरिए देश के विभिन्न कोनों की खाक छान रहे हैं। ओम प्रकाश 12 अगस्त को अपने घर से निकले थे। 
     
    उनकी इस यात्रा का उद्देश्य कोई रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना और अपनी आजाद सोच के जरिए खुद की पहचान बनाना है। खास बात यह है कि इस "भारत दर्शन" की कोई समय सीमा (Time Limit) तय नहीं है। 
     

    हिमालय की वादियों से नेपाल की गलियों तक 

    ओम प्रकाश के सफर की शुरुआत उत्तराखंड के बर्फीले चारधाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) से हुई। पंचप्रयाग की पवित्र यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने पड़ोसी देश नेपाल में पशुपतिनाथ और जनकपुर धाम के दर्शन किए। 
     

    क्यों चुना यह कठिन रास्ता?  

    उनकी आध्यात्मिक सूची में वाराणसी के काशी विश्वनाथ, विंध्याचल, चित्रकूट, गया और असम का कामाख्या देवी मंदिर भी शामिल है। जब ओम प्रकाश से इस खानाबदोश जीवन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी सरलता से जवाब दिया। 

    उन्‍होंने कहा क‍ि यह सफर सिर्फ अपनी खुशी और मन की शांति के लिए है। मेरे लिए आध्यात्मिकता कोई पारंपरिक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि लंबी दूरियां तय करके खुद को नए सिरे से खोजने का एक जरिया है।

    सांवला रंग, उलझे बाल और साइकिल पर बंधा सामान 

    सड़क किनारे चलते ओम प्रकाश को देखकर लोग ठिठक जाते हैं। वह पहले भी सुल्तानगंज से जल लेकर बैद्यनाथ धाम, तारापीठ और गंगासागर की कठिन यात्राएं कर चुके हैं। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि यदि मन में अटूट संकल्प हो, तो बिना किसी लग्जरी के भी दुनिया को एक नए नजरिए से देखा जा सकता है।