जमशेदपुर के शिखर अग्रवाल बढ़ाएंगे देश का मान, अमेरिका की ऐतिहासिक 'Sail 250' परेड में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
जमशेदपुर के युवा कैडेट शिखर अग्रवाल अमेरिका में 'सेल 250' परेड में भारतीय नौसेना के आईएनएस सुदर्शिनी पर भारत का ...और पढ़ें

अमेरिका में भारत का मान बढ़ा रहे जमशेदपुर के शिखर अग्रवाल।
HighLights
जमशेदपुर के शिखर अग्रवाल अमेरिका में भारत का प्रतिनिधित्व।
आईएनएस सुदर्शिनी पर 'सेल 250' परेड में शामिल।
झारखंड से एकमात्र कैडेट, देश का गौरव बढ़ाया।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर के सोनारी आशियाना गार्डन निवासी होनहार युवा कैडेट शिखर अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश और झारखंड का गौरव बढ़ाया है। भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक सेल ट्रेनिंग शिप आइएनएस सुदर्शिनी पर तैनात शिखर उन चुनिंदा 26 कैडेट्स के दल का हिस्सा हैं, जो अमेरिका में आयोजित प्रतिष्ठित ‘सेल 250’ (अंतरराष्ट्रीय समुद्री उत्सव और परेड श्रृंखला) परेड में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इस अभियान के लिए पूरे झारखंड से चयनित होने वाले शिखर एकमात्र कैडेट हैं। उनकी इस उपलब्धि से पिता अंकुश अग्रवाल, माता भावना अग्रवाल सहित पूरे परिवार और शहर में गर्व का माहौल है। शिखर हाल ही में अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंचे हैं, जहां उन्होंने मुख्य परेड के लिए आइएनएस सुदर्शिनी को ज्वाइन किया है।
भारतीय नौसेना के ‘लोकयान-26’ ट्रांस-ओशनिक अभियान के तहत संचालित इस यात्रा को कई चरणों में विभाजित किया गया है, जिनमें अलग-अलग कैडेट्स की तैनाती की जाती है। शिखर को अभियान के सबसे महत्वपूर्ण चरण के लिए चुना गया है।
क्योंकि इसी दौरान आइएनएस सुदर्शिनी अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली मुख्य ‘परेड आफ सेल’ में हिस्सा लेकर भारत की समुद्री क्षमता और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेगी। इस चरण में शिखर कुल 19 दिनों तक अमेरिका में रहेंगे।
नर्भेराम से स्कूलिंग, इंजीनियरिंग के बाद दी सीडीएस परीक्षा
शिखर अग्रवाल ने अपनी स्कूली शिक्षा बिष्टुपुर स्थित नर्भेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने मेक्ट्रोनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और सीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय नौसेना अकादमी में प्रवेश पाया। प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन और अनुशासन के दम पर उन्होंने दोनों टर्म में नौसेना का प्रतिष्ठित ‘एंकर पिन’ हासिल किया।
इस वैश्विक मिशन के सफल समापन के बाद नवंबर में उन्हें भारतीय नौसेना में परमानेंट कमीशंड आफिसर के रूप में नियुक्त किया जाएगा। झारखंड का यह युवा कैडेट आज विश्व के समुद्री मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गया है।
भारत की समुद्री विरासत का वैश्विक दूत आइएनएस सुदर्शिनी
आइएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक थ्री-मास्टेड बार्च सेल ट्रेनिंग शिप है, जिसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने स्वदेशी तकनीक से तैयार किया था। वर्ष 2012 में नौसेना में शामिल इस जहाज को ब्रिटेन के प्रसिद्ध नेवल आर्किटेक्ट कालिन मूडी ने डिजाइन किया है।
54 मीटर लंबे इस जहाज में 20 पाल, लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी रस्सियां और 1,035 वर्ग मीटर का सेल एरिया है। आधुनिक तकनीक से लैस यह जहाज युवा कैडेट्स को पारंपरिक सीमैनशिप और नेविगेशन का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ भारत की समुद्री विरासत का वैश्विक दूत भी माना जाता है।
कोच्चि से जनवरी में रवाना हुआ यह जहाज ओमान, मिस्र, माल्टा, फ्रांस, मोरक्को, स्पेन के कैनरी द्वीप समूह सहित 13 देशों की यात्रा करते हुए 13,000 समुद्री मील से अधिक की दूरी तय कर अमेरिका पहुंचा है।
