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    सरायकेला में हादसों को न्योता दे रहा रघुनाथपुर आंगनबाड़ी केंद्र का जर्जर भवन, बच्चों की सुरक्षा राम भरोसे

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 10:05 PM (IST)

    सरायकेला-खरसावां के रघुनाथपुर आंगनबाड़ी केंद्र का भवन जर्जर होने से बच्चों की सुरक्षा खतरे में है, जिसके कारण केंद्र सेविका के घर से संचालित हो रहा है ...और पढ़ें

    जर्जर हालत में सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड का रघुनाथपुर आंगनबाड़ी केंद्र।

    जर्जर हालत में सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड का रघुनाथपुर आंगनबाड़ी केंद्र।

    HighLights

    1. रघुनाथपुर आंगनबाड़ी भवन अत्यंत जर्जर, छत की सीलिंग गिर रही।

    2. बच्चों की सुरक्षा हेतु केंद्र सेविका के घर से संचालित।

    संस, मिलन चौक (ईचागढ़)। सरकारी योजनाओं में बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के तमाम बड़े दावों के बीच सरायकेला-खरसावां जिले से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। 
     
    ईचागढ़ प्रखंड का रघुनाथपुर आंगनबाड़ी केंद्र प्रशासनिक उदासीनता और व्यवस्था की हकीकत को साफ बयां कर रहा है। इस केंद्र का सरकारी भवन इतना जर्जर हो चुका है कि उसकी छत की सीलिंग लगातार टूटकर झड़ रही है। 
     
    हालात इतने खतरनाक हो चुके थे कि यदि समय रहते मासूम बच्चों को वहां से नहीं हटाया जाता, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा घट सकता था।
     

    सेविका के घर पर चल रहा केंद्र

    बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि देखते हुए फिलहाल आंगनबाड़ी सेविका रीता कुमारी के निजी घर से बच्चों की पढ़ाई और पोषण आहार का संचालन किया जा रहा है। 
     
    हालांकि, यह व्यवस्था केवल एक अस्थायी समाधान है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की मांग पिछले पांच से सात वर्षों से लगातार की जा रही है, लेकिन विभागीय फाइलें प्रशासनिक स्तर से आगे नहीं बढ़ सकीं। 
     
    ग्रामीणों का सवाल है कि जब प्रशासन को भवन के जर्जर होने की जानकारी वर्षों से थी, तो नए भवन के लिए समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
     

    बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ का क्या है कहना?

    इस पूरे मामले पर ईचागढ़ प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सह प्रभारी सीडीपीओ एकता वर्मा ने बताया कि भवन की अत्यंत जर्जर स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से केंद्र का संचालन सेविका के घर से कराया जा रहा है। 
     
    उन्होंने स्वीकार किया कि नए भवन के निर्माण के लिए संबंधित विभाग को पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन उच्च स्तर से अब तक इस पर स्वीकृति नहीं मिली है। 
     
    विभाग को पुनः एक स्मार पत्र (याद दिलाते हुए पत्र) भेजकर निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने का आग्रह किया गया है।
     

    प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे गंभीर सवाल

    अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या मासूम बच्चों की सुरक्षा भी सरकारी फाइलों और लंबी विभागीय स्वीकृति की प्रतीक्षा करेगी?
     
    एक तरफ सरकार कुपोषण मुक्त समाज और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा का दम भरती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी स्तर पर बच्चों को एक सुरक्षित छत तक नसीब नहीं हो पा रही है। 
     
    करोड़ों रुपये के बजट और विकास के दावों के बीच आंगनबाड़ी जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों के लिए सुरक्षित भवन उपलब्ध न हो पाना केवल प्रशासनिक ढुलमुल रवैया नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर कोताही भी है।