लाखों के रखरखाव फंड के बाद भी राजनगर CHC जर्जर, Delhi हादसे के बाद भी सबक नहीं ले रहा प्रशासन
राजधानी दिल्ली में इमारत ढहने की घटना के बाद राजनगर सीएचसी भवन की जर्जर हालत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

राजनगर प्रखंड के 1 सीएचसी, 3 पीएचसी और 32 उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सालाना करीब 73 लाख रुपये का फंड आवंटित किया जाता है।
HighLights
राजधानी दिल्ली में इमारत ढहने के बाद राजनगर सीएचसी की जर्जर हालत।
लाखों के रखरखाव फंड के बावजूद प्रसूति वार्ड में पानी टपकना।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया।
संवाद सूत्र, राजनगर। हाल ही में दिल्ली के सत्या निकेतन में एक जर्जर पांच मंजिला इमारत के ढहने से हुई मौत की दुखद घटना के बाद जर्जर सरकारी भवनों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस बीच सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
अस्पताल की पड़ताल में प्रसूति (मैटर्निटी) वार्ड के अलावा महिला एवं पुरुष वार्ड की छतों से बारिश का पानी टपकता पाया गया। छतों और दीवारों पर नमी के गहरे निशान हैं तथा कई स्थानों पर प्लास्टर टूटकर गिर रहा है।
मरीजों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर खतरा
बारिश के दौरान छतों से पानी टपकने के कारण मरीजों को अपने बेड इधर-उधर खिसकाने पड़ते हैं। सबसे अधिक दयनीय और गंभीर स्थिति प्रसूति वार्ड की है।
जहां नवजात शिशुओं और प्रसूताओं को रखा जाता है। ऐसी संवेदनशील जगह पर छत से पानी का रिसाव और कमजोर प्लास्टर का गिरना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहा है।
सालाना 73 लाख के आवंटन के बाद भी यह हाल
हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना के तहत राजनगर प्रखंड के 1 सीएचसी, 3 पीएचसी और 32 उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सालाना करीब 73 लाख रुपये का फंड आवंटित किया जाता है।
अकेले सीएचसी को हर साल 10 लाख रुपये छोटी-मोटी मरम्मत, रखरखाव और साफ-सफाई के लिए मिलते हैं। इसके बावजूद अस्पताल भवन की ऐसी बदहाली प्रबंधन और रोगी कल्याण समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन निर्माण की गुणवत्ता शुरू से ही खराब थी और प्रबंधन समिति की बैठकों में कोई पारदर्शिता नहीं रहती।
तकनीकी जांच और मरम्मत की सख्त जरूरत
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि दिल्ली जैसे हादसे का इंतजार करने के बजाय राजनगर सीएचसी भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
केवल ऊपरी प्लास्टर लगाने के बजाय भवन की छत, बीम और पिलर की मजबूती की जांच जरूरी है, ताकि अस्पताल आने वाले सैकड़ों मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारी का पक्ष: जल्द शुरू होगा मरम्मत का काम
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वीरांगना सिंकू ने बताया कि बीते दिनों प्रबंधन समिति की बैठक में अस्पताल की मरम्मत का निर्णय लिया जा चुका है।
कनिष्ठ अभियंता (JE) को प्राक्कलन (Estimate) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। एस्टीमेट मंजूर होते ही मरम्मत का काम तुरंत शुरू करा दिया जाएगा।
