Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पोटका विधायक संजीव सरदार ने ट्रैक्टर से तय किया 14 KM का दुर्गम सफर, गांवों में सुनीं समस्याएं

    Updated: Tue, 26 May 2026 11:59 PM (IST)

    विधायक संजीव सरदार ने पोटका के दुर्गम गांवों तक पहुंचने के लिए लग्जरी कार छोड़कर ट्रैक्टर से 14 किलोमीटर का सफर तय किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओ ...और पढ़ें

    मिठाईझरना गांव का हाल जानने ट्रैक्टर पर सवार होकर जाते विधायक संजीव सरदार।

    मिठाईझरना गांव का हाल जानने ट्रैक्टर पर सवार होकर जाते विधायक संजीव सरदार।

    HighLights

    1. विधायक संजीव सरदार ने ट्रैक्टर से 14 किलोमीटर का सफर तय किया।

    2. दुर्गम गांवों में बिजली, सड़क, पानी की समस्या सुनी।

    3. मुख्यमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत विद्युतीकरण का शिलान्यास किया।

    संसू, जादूगोड़ा। जब अमूमन लग्जरी गाड़ियों के काफिले में घूमने वाले माननीय विधायक को अचानक गांव के लोगों ने ट्रैक्टर की सवारी करते देखा, तो वे कुछ पल के लिए चौंक उठे। तपती धूप और कड़ाके की गर्मी के बीच जब कोई चुनाव भी न हो, तब एक विधायक का एसी गाड़ियां छोड़कर ट्रैक्टर पर सवार होना वाकई हैरान करने वाला था।

    यह दिलचस्प नजारा पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मिठाईझरना गांव (नारदा पंचायत) के पथरीले रास्तों पर देखने को मिला। यहां के विधायक संजीव सरदार विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को अपने साथ लेकर ट्रैक्टर की सवारी करते हुए लगभग 14 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी मार्ग तय कर इस सुदूर गांव पहुंचे। 
     

    आखिर क्यों करना पड़ा ट्रैक्टर का सफर? 

    दरअसल, मिठाईझरना और उसके आस-पास के गांवों तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की या सुगम सड़क नहीं है। पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण यहां साधारण या लग्जरी वाहनों से पहुंच पाना नामुमकिन है। 
     
    इन रास्तों पर केवल ट्रैक्टर ही एकमात्र वैकल्पिक और मजबूत साधन था। यह तस्वीर जहां एक तरफ विधायक की विकासशील सोच और जमीनी जुड़ाव को दर्शाती है, वहीं आजादी के इस आधुनिक युग में सरकार के विकास के दावों की जमीनी हकीकत को भी बयां करती है।
     

    ग्रामीणों के संग जमीन पर बैठकर सुनीं समस्याएं 

    मिठाईझरना, चुकागोड़ा, बांसबनी और जामकुटा जैसे गांवों में आजादी के 78 वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। इन गांवों में मुख्य रूप से आदिम जनजाति सबर एवं अन्य आदिवासी परिवार निवास करते हैं।

    विधायक संजीव सरदार ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई और जमीन पर बैठकर उनकी बिजली, सड़क, पानी, आवास, और पेंशन जैसी मूलभूत समस्याओं की जानकारी ली। विधायक के साथ कई विभागों के आला अधिकारी भी मौजूद थे। 
     
    शायद अपने जीवन में पहली बार इस सुदूर पहाड़ी इलाके के गांवों में कदम रख रहे थे। विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इन समस्याओं को दूर करने के लिए जल्द से जल्द एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार करें।
     

    टाटा के सोलर पैनल का था सहारा 

    इन गांवों में विकास की पहली बड़ी किरण तब दिखी जब विधायक ने 'मुख्यमंत्री उज्ज्वला योजना' (विद्युतीकरण कार्यक्रम) के तहत चारों गांवों में बिजली पहुंचाने की योजना का शिलान्यास किया। इसके साथ ही इन गांवों में पहली बार नियमित बिजली पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है।

     

    वर्तमान में इन गांवों के कुछ चुनिंदा घरों में टाटा स्टील द्वारा सामाजिक सरोकार के तहत लगाए गए सोलर पैनल के माध्यम से ही सिर्फ रोशनी का उपयोग किया जा रहा था। बिजली विभाग के एसडीओ मो. सैफुद्दीन ने बताया कि जल्द ही इस योजना का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को इस अंधियारे से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी। 
     

    गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा: संजीव सरदार 

    इस मौके पर विधायक संजीव सरदार ने कहा क‍ि इन पहाड़ी गांवों में कभी माओवादियों का भारी प्रभाव रहा था, जिसके कारण लंबे समय तक विकास कार्य पूरी तरह बाधित रहे। लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं। 
     
    उन्‍होंने कहा क‍ि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही हमारी 'अबुआ सरकार' का मुख्य उद्देश्य है। इन गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कर इन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

    खबरें और भी