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    पटमदा में महिला नक्सली की सूचना पर दबिश के दौरान हंगामा: ग्रामीणों ने एसटीएफ जवानों व थाना प्रभारी को 4 घंटे घेरा

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 09:56 PM (IST)

    जमशेदपुर के पटमदा थाना क्षेत्र के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस और एसटीएफ टीम को चार घंटे तक घेरे रखा। ...और पढ़ें

    लाठी-डंडों से लैस बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने पटमदा थाना प्रभारी और भुइयांसिनान कैंप के एसटीएफ जवानों समेत पूरी टीम को करीब चार घंटे तक घेरे रखा।

    लाठी-डंडों से लैस बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने पटमदा थाना प्रभारी और भुइयांसिनान कैंप के एसटीएफ जवानों समेत पूरी टीम को करीब चार घंटे तक घेरे रखा।

    HighLights

    1. महिलाओं को ले जाने पर ग्रामीण हुए आक्रोशित।

    2. प्रशासनिक हस्तक्षेप से मामला शांत, हिरासत वाले छूटे।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पटमदा थाना क्षेत्र के बाटालुका गांव स्थित कितापाठ जाहेरथान के पास शनिवार सुबह नक्सल विरोधी सर्च अभियान पर निकली पुलिस और सुरक्षा बलों की एलआरपी (लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग) टीम को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
     
    लाठी-डंडों से लैस बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने पटमदा थाना प्रभारी और भुइयांसिनान कैंप के एसटीएफ जवानों समेत पूरी टीम को करीब चार घंटे तक घेरे रखा।
     

    पूछताछ के लिए महिलाओं को ले जाने पर भड़का आक्रोश

    जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल शुक्रवार शाम दलमा रेंज के झुंझका, मेघादह, राजाबासा, अपो और सारी गांव होते हुए बाटालुका पहुंचे थे। 
     
    अभियान के दौरान गांव में कई घरों की तलाशी ली गई। पुलिस टीम बाटालुका निवासी लक्खन सोरेन और उनकी दो पत्नियों, भारती सोरेन व सूमी सोरेन को पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाने लगी। 
     
    इसी बीच घर में मौजूद लक्खन सोरेन की 10 वर्षीय बेटी पार्वती के रोने-चिल्लाने पर आसपास के लोग जुटने लगे और देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया।
     

    हिरासत में लिए गए युवक को छोड़ने की मांग

    ग्रामीणों ने लक्खन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों को तुरंत छोड़ने के साथ-साथ बुधवार से पटमदा थाने में हिरासत में रखे गए बाटालुका निवासी युधिष्ठिर महतो को भी मुक्त करने की मांग रखी। 
     
    ग्रामीणों का साफ कहना था कि जब तक हिरासत में लिए गए लोगों को नहीं छोड़ा जाता, तब तक पुलिस टीम को जाने नहीं दिया जाएगा।
     

    प्रशासनिक पहल से शांत हुआ मामला

    मामला बढ़ता देख स्थानीय स्तर पर वार्ता शुरू हुई। सुबह करीब 9 बजे जिला पार्षद प्रदीप बेसरा की मध्यस्थता और पहल पर पटमदा थाने से युधिष्ठिर महतो को मौके पर लाया गया। 
     
    इसके बाद लक्खन सोरेन, उनकी पत्नियों और युधिष्ठिर महतो को छोड़े जाने पर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने रास्ता खाली किया।
     

    ग्रामीण एसपी व डीएसपी ने की बैठक

    घटना के बाद जमशेदपुर के ग्रामीण एसपी शुभम कुमार खंडेलवाल और पटमदा डीएसपी दयानंद कुमार ने भुइयांसिनान एसटीएफ पिकेट पर क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों के साथ बैठक की। 
     
    पुलिस अधिकारियों ने भविष्य में सुरक्षा बलों की घेराबंदी न करने की अपील की। ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि महिलाओं को ले जाने को लेकर उनके बीच गलतफहमी हो गई थी और उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी।