Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    चार्ली ग्रिफिथ की बाउंसर से खत्म हुआ करियर, लेकिन टाटा मोटर्स ने जिंदगी भर दिया नरी कांट्रैक्टर का साथ

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 08:00 AM (IST)

    भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नरी कांट्रैक्टर का करियर 1962 में वेस्टइंडीज दौरे पर सिर में लगी गंभीर चोट से समाप्त हो गया था। ...और पढ़ें

    वर्ष 1962 में वेस्टइंडीज दौरे पर सिर में लगी गंभीर चोट से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नरी कांट्रैक्टर का करियर पर अचानक विराम लग गया था

    वर्ष 1962 में वेस्टइंडीज दौरे पर सिर में लगी गंभीर चोट से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नरी कांट्रैक्टर का करियर पर अचानक विराम लग गया था

    HighLights

    1. नरी कांट्रैक्टर का करियर 1962 में सिर की चोट से समाप्त।

    2. जेआरडी टाटा के नेतृत्व में टेल्को ने दिया जीवनभर सहारा।

    3. कंपनी ने इलाज और नौकरी देकर मानवीय संवेदनशीलता दिखाई।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नरी कांट्रैक्टर का टेल्को (वर्तमान में टाटा मोटर्स) से जुड़ाव केवल एक पेशेवर संबंध नहीं था, बल्कि यह कॉर्पोरेट संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की एक बेमिसाल दास्तान थी। 
     
    वर्ष 1962 में वेस्टइंडीज दौरे पर सिर में लगी गंभीर चोट से उनके करियर पर अचानक विराम लग गया था, लेकिन टाटा समूह ने उनका हाथ थामकर उन्हें जीवनभर का सहारा दिया।
     

    घातक बाउंसर से खतरे में पड़ा जीवन 

    घटना मार्च 1962 की है, जब महज 26 वर्ष की आयु में भारतीय टीम के कप्तान बने नरी कांट्रैक्टर वेस्टइंडीज दौरे पर थे।
     
    बारबाडोस के खिलाफ मैच के दौरान कैरेबियाई तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ की एक जानलेवा बाउंसर सीधे उनके सिर के पिछले हिस्से पर जा लगी। 
     
    इस खतरनाक हादसे ने उन्हें जीवन और मृत्यु के मोड़ पर ला खड़ा किया। डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए सिर की कई जटिल सर्जरी करनी पड़ीं और सुरक्षा के तौर पर सिर में टाइटेनियम (मेटल) की प्लेट लगानी पड़ी। 
     
    इस हादसे के कारण मात्र 28 वर्ष की आयु में उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
     

    जेआरडी टाटा का मानवीय दृष्टिकोण 

    करियर असमय खत्म होने के बाद जब नरी कांट्रैक्टर का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में था, तब टेल्को (टाटा मोटर्स) ने उनके प्रति असाधारण संवेदनशीलता दिखाई। 
     
    तत्कालीन टाटा समूह के चेयरमैन जेआरडी टाटा के मार्गदर्शन में कंपनी ने न केवल उनके इलाज का संपूर्ण खर्च और नौकरी का जिम्मा उठाया, बल्कि उन्हें कंपनी में एक सम्मानित कार्यकारी अधिकारी (एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) का पद भी प्रदान किया।
     

    मेटल प्लेट के साथ मैदान पर वापसी 

    कंपनी के इसी अटूट विश्वास और सहयोग के दम पर नरी ने अदम्य साहस का परिचय दिया। सिर में मेटल प्लेट लगे होने के बावजूद उन्होंने मैदान पर वापसी की। 
     
    उन्होंने टाटा स्पोर्ट्स क्लब की कप्तानी संभाली और 1970-71 तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट (फर्स्ट क्लास क्रिकेट) खेलना जारी रखा।
     
    टेल्को का यह ऐतिहासिक कदम खेल जगत और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) की एक अमिट मिसाल है।