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छोटी गर्दन और अधिक वजन बना चुनौती: MGM के डॉक्टरों ने Fiber optic तकनीक से बचाई मरीज की जान

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:38 PM (IST)

एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर के डॉक्टरों ने एक 62 वर्षीय महिला की जटिल पित्ताशय की सर्जरी सफलतापूर्वक की। अधिक वजन और ...और पढ़ें

एमजीएम में एनेस्थीसिया और सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने जटिल एयरवे केस में सफलता हासिल की है।

एमजीएम में एनेस्थीसिया और सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने जटिल एयरवे केस में सफलता हासिल की है।

HighLights

  1. एमजीएम जमशेदपुर में जटिल पित्ताशय की सर्जरी सफल हुई।

  2. फाइबर ऑप्टिक ब्रोंकोस्कोपिक इंट्यूबेशन तकनीक का उपयोग किया गया।

  3. अधिक वजन और छोटी गर्दन वाली मरीज को बचाया गया।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एनेस्थीसिया और सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने एक जटिल एयरवे केस में बड़ी सफलता हासिल की है। 
 
डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक का उपयोग कर 62 वर्षीय महिला मरीज को सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया, जिसके बाद उनकी पित्ताशय (गॉलब्लेडर) की सफल सर्जरी की गई।
 

बढ़ा वजन और छोटी गर्दन बनी चुनौती 

जुगसलाई के मिल्लत नगर की रहने वाली फिरोजा खातून (62) पित्ताशय में पथरी और सूजन की समस्या से पीड़ित थीं। मरीज का वजन अधिक होने के साथ ही उनकी गर्दन छोटी थी और सांस की नली काफी जटिल थी। 
 
ऐसे में सामान्य प्रक्रिया से मरीज को एनेस्थीसिया देना और सांस की नली में ट्यूब (इंट्यूबेशन) डालना काफी जोखिम भरा था।
 

फाइबर ऑप्टिक ब्रोंकोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल 

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए एनेस्थीसिया टीम ने फाइबर ऑप्टिक ब्रोंकोस्कोपिक इंट्यूबेशन तकनीक का सहारा लिया। 
 
इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए डॉक्टरों ने सांस की नली को स्क्रीन पर देखते हुए सुरक्षित तरीके से ट्यूब डाली और मरीज को एनेस्थीसिया दिया।
 
इसके बाद मुख्य सर्जन डॉ. एसपी गुप्ता और उनकी टीम ने पित्ताशय का सफल ऑपरेशन किया।
 

चिकित्सकों की टीम की सराहनीय भूमिका 

इस सफल इलाज में एनेस्थीसिया प्रभारी डॉ. संजीव कुमार के मार्गदर्शन में डॉ. नयन, डॉ. शुभदीप और डॉ. सिमरन ने मुख्य भूमिका निभाई।

टीम में डॉ. रिया, डॉ. नीलम, डॉ. मोहित सहित नर्सिंग स्टाफ सोनी और ओटी स्टाफ नितेश का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

चिकित्सकों के अनुसार, जटिल सांस की नली वाले मरीजों में फाइबर ऑप्टिक तकनीक बेहद कारगर साबित होती है। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।