जब JRD TATA ने खोले थे पूर्व दिग्गज विकेटकीपर फारूख इंजीनियर के पैड्स, जमशेदपुर के दिनों का वह अनछुआ किस्सा
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज फारूख इंजीनियर के जीवन में जेआरडी टाटा की भूमिका अहम रही है। इसमें 1973 में उनके पैड्स खोलने और 1968 में काउंटी क्रिकेट खेलने ...और पढ़ें

ब्रेबॉर्न स्टेडियम में फरवरी 1973 में पानी देने के बाद जेआरडी टाटा नीचे झुके और फारूख के पैरों में बंधे पैड्स के बकल खोलने लगे थे।
HighLights
जेआरडी टाटा ने फारूख इंजीनियर के पैड्स खोलकर सादगी दिखाई।
जेआरडी टाटा ने फारूख को काउंटी क्रिकेट खेलने की सलाह दी।
फारूख इंजीनियर टेल्को में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में कार्यरत थे।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज फारूख इंजीनियर के जीवन और करियर में जमशेदपुर स्थित टेल्को (वर्तमान में टाटा मोटर्स) तथा टाटा समूह के तत्कालीन अध्यक्ष जेआरडी टाटा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
जेआरडी टाटा की अभूतपूर्व सादगी और उनकी दूरदर्शी सोच से जुड़ा एक ऐसा ही अनछुआ किस्सा सामने आया है, जिसने इस स्टार क्रिकेटर की पूरी जिंदगी बदल दी।
जब ड्रेसिंग रूम में जेआरडी टाटा ने खोले पैड्स
यह ऐतिहासिक वाकया फरवरी 1973 का है, जब मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच रोमांचक टेस्ट मैच खेला जा रहा था। इस मुकाबले में फारूख इंजीनियर ने 121 रनों की यादगार शतकीय पारी खेली थी।
दिन का खेल खत्म होने के बाद फारूख जब पसीने से लथपथ होकर ड्रेसिंग रूम में थके हुए बैठे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति उनके लिए पानी का गिलास लेकर आ रहा है। ध्यान से देखने पर फारूख अवाक रह गए; वे खुद जेआरडी टाटा थे।
इतना ही नहीं, पानी देने के बाद जेआरडी टाटा नीचे झुके और फारूख के पैरों में बंधे पैड्स के बकल खोलने लगे। देश के सबसे बड़े उद्योगपति की इस विनम्रता और सादगी को देखकर फारूख भावुक हो गए।
जेआरडी टाटा ने उन्हें गले लगाया और दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। उल्लेखनीय है कि उस समय फारूख इंजीनियर टेल्को में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में कार्यरत थे।
वह सलाह जिसने चमकाया काउंटी क्रिकेट करियर
इससे पहले, वर्ष 1968 में जब फारूख इंजीनियर को इंग्लैंड की प्रसिद्ध काउंटी टीम लंकाशायर से खेलने का ऐतिहासिक प्रस्ताव मिला था, तब वे टेल्को की अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़ने को लेकर भारी असमंजस में थे।
उस वक्त जेआरडी टाटा ने ही उनके मार्गदर्शक (गॉडफादर) बनकर सही राह दिखाई थी। जेआरडी टाटा ने फारूख से कहा था कि तुम बेझिझक इंग्लैंड जाओ, पेशेवर क्रिकेट खेलो, पैसे कमाओ, पढ़ाई पूरी करो और बेहतर डिग्री हासिल करके वापस लौटो, ताकि टाटा में और ऊंचे पद पर काम कर सको।
जेआरडी टाटा की इसी प्रेरणा और दूरदर्शिता के बल पर फारूख 1968 से 1976 तक लंकाशायर के लिए खेले और विश्व क्रिकेट में अपनी एक अलग पहचान बनाई।