कोल्हान में लाल आतंक का आखिरी अध्याय: अग्रिम कतार ध्वस्त, सारंडा में बचे-खुचे नक्सली जान बचाकर बंगाल भागे
सरायकेला-खरसावां में तीन इनामी माओवादियों की गिरफ्तारी के बाद कोल्हान में लाल आतंक की अग्रिम कतार ध्वस्त हो गई है। यह डेढ़ दशक से चले आ रहे सुरक्षा अभ ...और पढ़ें

इंद्रजीत महथा, डीआईजी झारखंड एसटीएफ।
HighLights
सरायकेला-खरसावां में ₹22 लाख के तीन इनामी माओवादी गिरफ्तार।
कोल्हान प्रक्षेत्र में माओवादियों की अग्रिम कतार पूरी तरह ध्वस्त।
सारंडा के जंगल अब लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त हुए।
प्रदीप सिंह, जमशेदपुर। जिस सारंडा के घने और दुर्गम जंगलों को कभी माओवादियों का सबसे अभेद्य और सुरक्षित गढ़ माना जाता था, आज वही इलाका लाल आतंक के खात्मे की गवाही दे रहा है।
बुधवार को सरायकेला-खरसावां से पकड़े गए तीन प्रमुख माओवादियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि कोल्हान प्रक्षेत्र से माओवादियों की अग्रिम कतार अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
लंबे समय से सक्रिय नक्सलियों के दस्तों के बिखरने के बाद बचे-खुचे कैडर जान बचाकर पश्चिम बंगाल की सीमाओं में भाग चुके हैं। यह मुकाम किसी एक अभियान की सफलता नहीं है।
बल्कि डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक चले लगातार सुरक्षा अभियानों, सटीक खुफिया कार्रवाई और चौतरफा विकास की संयुक्त रणनीति का परिणाम है।
बुधवार की बड़ी सफलता: ₹22 लाख के 3 इनामी नक्सली गिरफ्तार
झारखंड-बंगाल सीमा पर सरायकेला-खरसावां पुलिस और सीआरपीएफ ने एक संयुक्त और सटीक खुफिया ऑपरेशन में तीन प्रमुख माओवादियों को गिरफ्तार किया:
- मदन महतो उर्फ शंकर महतो उर्फ चरण: रीजनल कमेटी सदस्य (₹15 लाख का इनामी)।
- रवि सिंह सरदार उर्फ सागर सिंह सरदारा उर्फ बिरेन सिंह: स्वयंभू सब-जोनल कमांडर (₹5 लाख का इनामी)।
- मीना पहाड़िया उर्फ नीपू पहाड़िया उर्फ मीरा: स्वयंभू एरिया कमांडर (₹2 लाख की इनामी)।
83 सुरक्षा जवानों की शहादत और ग्रामीणों की भारी कीमत
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 6 मार्च 2000 से जुलाई 2023 के दौरान कोल्हान प्रक्षेत्र में नक्सली हिंसा का मुकाबला करते हुए कम से कम 83 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने वीरगति प्राप्त की।
इसी अवधि में सुरक्षा बलों ने 49 माओवादियों को भी मार गिराया। हालांकि, इस लड़ाई की सबसे बड़ी कीमत स्थानीय ग्रामीणों को चुकानी पड़ी।
माओवादियों ने ग्रामीणों को पुलिस मुखबिर बताकर उनकी बर्बर हत्याएं कीं, सड़कों व इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में बाधाएं डालीं और आईईडी (IED) विस्फोटों से निर्दोष लोगों को निशाना बनाया।
अकेले वर्ष 2023 में ही पश्चिमी सिंहभूम जिले में 10 महीनों के भीतर 11 निर्दोष नागरिकों की माओवादी हिंसा में जान चली गई थी।
मुख्य अभियान: जिन्होंने बदली सारंडा की तस्वीर
- 2010 (ऑपरेशन ग्रीन हंट): झारखंड में माओवादियों के खिलाफ बड़ा संयुक्त अभियान शुरू। जून 2010 में बंदगांव क्षेत्र में 10 माओवादी मारे गए और 8 नक्सली प्रशिक्षण शिविर ध्वस्त हुए।
- अगस्त 2011 (ऑपरेशन मानसून): सारंडा की करीब 700 पहाड़ियों वाले अति-दुर्गम इलाके में 5,000 से ज्यादा जवानों को उतारा गया। एक महीने चले इस अभियान में 33 माओवादी गिरफ्तार हुए और 179 लैंडमाइन बरामद की गईं।
- 2011 (ऑपरेशन एनाकोंडा): सारंडा में नक्सलियों की रीढ़ तोड़ने के लिए विशेष 'ऑपरेशन एनाकोंडा' चलाया गया।
- अगस्त 2025 (जंगल में कसा शिकंजा): स्वतंत्रता दिवस से पूर्व बड़ी साजिश रच रहे माओवादी एरिया कमांडर अरुण उर्फ निलेश मकदम को संयुक्त अभियान में मार गिराया गया।
- 22 जनवरी 2026 (ऑपरेशन मेधाबुरू): सारंडा के किरीबुरू क्षेत्र में 209 कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ₹1 करोड़ के इनामी केंद्रीय कमेटी सदस्य अनिल उर्फ पतराम मांझी समेत 15 माओवादी ढेर किए गए।
नहीं सोचा था इतनी जल्दी आएगा ऐसा पल - इंद्रजीत महथा
झारखंड पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के DIG इंद्रजीत महथा इस ऐतिहासिक सफलता को जवानों और अधिकारियों के त्याग और समर्पण का परिणाम बताते हैं।
महथा के अनुसार, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी ऐसा दिन आएगा जब कोल्हान से माओवादी प्रभाव पूरी तरह समाप्ति के कगार पर पहुंच जाएगा।
चाईबासा में पुलिस अधीक्षक (SP) रहते हुए इंद्रजीत महथा ने कई सफल नक्सल-विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया था और उस दौर में वे स्वयं माओवादियों की 'हिटलिस्ट' में शामिल थे।