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    झारखंड का पहला इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च जमशेदपुर में बनेगा, 3000 कुशल चालक हर साल होंगे तैयार

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 05:35 PM (IST)

    झारखंड में सड़क दुर्घटनाएं कम करने और कुशल चालक तैयार करने के लिए जमशेदपुर के मनपीटा में राज्य का पहला इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (I ...और पढ़ें

    केंद्र सरकार देगी 17 करोड़ रुपये का अनुदान, सिमुलेटर से हर साल तैयार होंगे तीन हजार कुशल चालक।

    केंद्र सरकार देगी 17 करोड़ रुपये का अनुदान, सिमुलेटर से हर साल तैयार होंगे तीन हजार कुशल चालक।

    HighLights

    1. मनपीटा, जमशेदपुर में राज्य का पहला IDTR बनेगा।

    2. टाटा मोटर्स और परिवहन विभाग के बीच एमओयू।

    3. हर साल तीन हजार कुशल चालक होंगे तैयार।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और उद्योगों के लिए कुशल चालक तैयार करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। टेल्को क्षेत्र के मनपीटा में राज्य के पहले इंस्टीट्यूट आफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आइडीटीआर) की स्थापना के लिए मंगलवार को परिवहन विभाग और टाटा मोटर्स के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे।

    रांची के प्रोजेक्ट भवन में दोपहर एक बजे होने वाले इस अहम समझौते के साथ ही 22.03 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा। यह अत्याधुनिक संस्थान मनपीटा में करीब 11.88 एकड़ भूमि पर पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) माडल पर स्थापित होगा।

    इसके लिए 2015 में भी शुरुआती प्रयास हुए थे, लेकिन तब बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। राज्य में बेकाबू रफ्तार के कारण हो रहे हादसों और कुशल व्यावसायिक चालकों की भारी कमी को देखते हुए सरकार ने इस पर तेजी से काम किया।

    नतीजतन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में इसी साल 12 मार्च को कैबिनेट ने इसकी डीपीआर को हरी झंडी दे दी। इस अहम परियोजना के लिए केंद्र का सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय 17 करोड़ रुपये का अनुदान देगा। वहीं, राज्य सरकार 3.21 करोड़ और टाटा मोटर्स अपने सीएसआर फंड से 1.82 करोड़ रुपये का योगदान देगी।

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    टाटा मोटर्स का ही क्यों हुआ चयन

    वाणिज्यिक वाहनों के निर्माण में टाटा मोटर्स का लौहनगरी में मदर प्लांट है। आटोमोबाइल सेक्टर में कंपनी का दशकों का अनुभव है और वह देश के कई राज्यों में आइडीटीआर का पहले से ही सफल संचालन कर रही है।

    इसी तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षण क्षमता को देखते हुए सरकार ने संचालन का जिम्मा टाटा मोटर्स को सौंपा है, जबकि नीतिगत नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास रहेगी।

    वैज्ञानिक तकनीक से मिलेगी ट्रेनिंग

    इस टियर-1 संस्थान में पारंपरिक तरीकों के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां अत्याधुनिक ड्राइविंग ट्रैक, सिमुलेटर, व्हीकल टेस्टिंग और प्रशिक्षक विकास केंद्र जैसी सुविधाएं होंगी।

    हर साल तीन हजार से अधिक चालकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ट्रेनिंग मिलेगी। महिला चालकों, खासकर पिंक आटो चलाने वाली महिलाओं को सशक्त बनाने पर विशेष जोर रहेगा। यह संस्थान न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे भी खोलेगा।