झारखंड की प्राचीन डोकरा कला का होगा कायाकल्प; ट्रेनिंग के लिए छत्तीसगढ़ जाएंगे मुसाबनी के कारीगर
पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने मुसाबनी के कुईलीसुता गांव का दौरा कर डोकरा कला कारीगरों से संवाद किया। ...और पढ़ें

डोकरा आर्ट के कारीगरों से उनकी समस्याएं सुनते उपायुक्त।
HighLights
उपायुक्त ने डोकरा कला कारीगरों से सीधा संवाद किया।
कारीगरों को आधुनिक प्रशिक्षण और छत्तीसगढ़ एक्सपोजर मिलेगा।
जमशेदपुर में स्थायी बाजार और जीआई टैग की योजना।
कारीगरों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
संवाद के दौरान उपायुक्त ने कारीगरों की समस्याओं, कच्चे माल की कमी और मार्केटिंग की बाधाओं को समझा। उन्होंने कारीगरों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी हर संभव मदद करेगा:
- ट्रेनिंग और डिजाइन: बाजार की मांग के अनुसार उत्पादों की फिनिशिंग, पैकेजिंग और नए डिजाइन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- छत्तीसगढ़ का दौरा: कारीगरों को नवाचार और आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराने के लिए डोकरा आर्ट के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में एक्सपोज़र विजिट पर भेजा जाएगा।
- मार्केटिंग सपोर्ट: उत्पादों को ई-मार्केटप्लेस और सरकारी योजनाओं से जोड़कर बिचौलियों को खत्म करने का प्रयास होगा।
जमशेदपुर के साकची में मिलेगा स्थायी बाजार
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमशेदपुर के व्यस्ततम इलाके साकची स्थित विश्वकर्माप्वाइंट में इन कारीगरों को स्थायी जगह आवंटित की जाए। इससे न केवल स्थानीय लोग इस कला को करीब से देख पाएंगे, बल्कि कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए एक बड़ा मंच भी मिलेगा।
'वोकल फॉर लोकल' पर जोर
उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि डोकरा आर्ट न केवल हमारी पहचान है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और 'वोकल फॉर लोकल' का बेहतरीन उदाहरण है। इसे GI टैग और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर कारीगरों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार लाया जाएगा। इस दौरान अंचल अधिकारी पवन कुमार और JSLPS के डीपीएम सुजीत बारी सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
