जमशेदपुर की खेल विरासत: फारूख इंजीनियर से योहानन तक, वो धरती जहां रचे गए इतिहास के पन्ने
टाटा मोटर्स (टेल्को) ने जमशेदपुर की खेल विरासत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने दशकों तक कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एथलीटों को पोषित किया। ...और पढ़ें

देश के दिग्गज एथलीट वाई एस चौहान, टी.सी.योहानन और बहादुर सिंह।
HighLights
टेल्को ने जमशेदपुर की खेल विरासत को दशकों तक संवारा।
1974 एशियाई खेलों में टेल्को के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीते।
जितेंद्र कुमार सिंह, जमशेदपुर। टाटा स्टील की तरह टाटा मोटर्स (जिसे पहले टेल्को कहा जाता था) ने भी जमशेदपुर की खेल संस्कृति को दशकों तक संवारा है।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विकेटकीपर फारूख इंजीनियर टेल्को में मैनेजमेंट ट्रेनी रह चुके हैं, जिन्हें कंपनी और जेआरडी टाटा का सीधा संरक्षण प्राप्त था।
हालांकि, एथलेटिक्स के क्षेत्र में टेल्को की पहचान इससे भी कहीं अधिक भव्य और ऐतिहासिक रही है। 1974 के तेहरान एशियाई खेलों में भारत ने एथलेटिक्स में जो चार स्वर्ण पदक जीते थे।
उनमें से दो स्वर्ण पदक विजेता डिकैथलान स्टार वी.एस. चौहान और लंबी कूद के टी.सी. योहानन- टेल्को में ही कार्यरत थे।
इनके अलावा बहादुर सिंह, जगराज सिंह और सुरेश बाबू भी तेहरान में पदक जीतने वाले टेल्को के ही खिलाड़ी थे। उस दौर में टेल्को भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े दिग्गजों का ठिकाना था।
योहानन ने तेहरान एशियाड में 8.07 मीटर की लंबी कूद लगाकर नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया था, जो लगभग तीन दशकों तक अटूट रहा।
गोला फेंक खिलाड़ी बहादुर सिंह ने तेहरान में रजत जीता और बाद में 1978 बैंकाक तथा 1982 दिल्ली एशियाड में लगातार दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
एक दिलचस्प किस्सा आज भी टेल्को के खेल गलियारों में याद किया जाता है- जब कोच सुरेश गुजराती ने बहादुर सिंह और जगराज सिंह को पहली बार टेल्को के तत्कालीन शीर्ष अधिकारी सरोज जे. गांधी के सामने पेश किया, तो उन्हें दो हाथी के बच्चे कहकर परिचित कराया था।
मिनी इंडिया बनी टेल्को की टीम
टेल्को की एथलेटिक्स टीम में पूरे देश से प्रतिभाएं जुटी थीं:
- पंजाब: बहादुर सिंह और जगराज सिंह
- केरल: टी.सी. योहानन और सुरेश बाबू
- मध्य प्रदेश व लखनऊ: वी.एस. चौहान
- हरियाणा: पोल वाल्टर राजेंद्र और ऊंची कूद के ओम प्रकाश
- उत्तर प्रदेश: वसीम नकवी
- दिल्ली: बीडी शर्मा (800 मीटर)
इनके अलावा लंबी दूरी के धावक धर्मवीर, क्वार्टर मिलर हरकमलजीत सिंह, 100 मीटर विशेषज्ञ ए. अजीज तथा मध्यम दूरी के सी. प्रताप कुमार और पुरुषोत्तम भी इसी टीम का गौरव थे।
सुवर्णरेखा के किनारे कठोर अभ्यास
उस दौर में आज की तरह आधुनिक जिम या इंडोर फिटनेस सेंटर नहीं थे। इसके बावजूद खिलाड़ी दिन में दो बार एथलेटिक्स ट्रैक पर पसीना बहाते थे और जंगलों के रास्ते सुवर्णरेखा नदी के किनारे क्रास-कंट्री दौड़ लगाते थे।
टेल्को कॉलोनी के एन-टाइप क्वार्टरों में रहने वाले ये खिलाड़ी शाम को एक साथ चाय की चुस्कियों के साथ गपशप करते थे। कंपनी के इस 'कर्मचारी-खिलाड़ी मॉडल' ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
विरासत आज भी है कायम
इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि बहादुर सिंह बाद में 25 वर्षों तक भारतीय एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच रहे। टेल्को की यह महान खेल परंपरा आज भी जीवित है।
क्षेत्र के बी. नरसिंह राव ने राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 200 और 400 मीटर स्पर्धा में पदक हासिल किए। वहीं टाटा मोटर्स की फुटबॉल टीम जमशेदपुर स्पोर्टिंग एसोसिएशन (JSA) लीग में लगातार सक्रिय है।
टेल्को क्लब और सुमंत मूलगांवकर स्टेडियम आज भी शहर की खेल गतिविधियों का मुख्य केंद्र हैं। कर्मचारियों को रोजगार के साथ खेल सुविधाएं देने वाला यह मॉडल जमशेदपुर की पहचान बना हुआ है।