बहरागोड़ा-धालभूमगढ़ में 24 घंटे निर्बाध बिजली का सपना होगा साकार, केंद्र से मिली वन स्वीकृति
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने जमशेदपुर वन प्रमंडल में 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए वन भूमि उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इससे पूर्वी सिंहभूम ...और पढ़ें

बहरागोड़ा से चाकुलिया तक का क्षेत्र लंबे समय से लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की गंभीर समस्या से जूझ रहा है।
HighLights
केंद्रीय मंत्रालय ने 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन को दी मंजूरी।
बहरागोड़ा-धालभूमगढ़ में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति होगी संभव।
वन्यजीव सुरक्षा के साथ क्षतिपूरक वनीकरण भी किया जाएगा।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति का सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जमशेदपुर वन प्रमंडल के तहत चाकुलिया LILO-1 और LILO-2 (132 केवी डबल सर्किट) ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण के लिए वन भूमि के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (JUSNL) द्वारा क्रियान्वित यह अति-महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजना विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित झारखंड पावर सिस्टम इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट का प्रमुख हिस्सा है।
मजबूत होगा जिले का पावर ग्रिड नेटवर्क
इस 132 केवी हाई-टेंशन ट्रांसमिशन लाइन का मुख्य उद्देश्य बहरागोड़ा और धालभूमगढ़ क्षेत्र को आपस में मजबूती से जोड़ना है।
परियोजना के लिए चाकुलिया LILO-1 के तहत 2.44 हेक्टेयर और LILO-2 के लिए 2.06 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की अनुमति दी गई है।
बहरागोड़ा से चाकुलिया तक का क्षेत्र लंबे समय से लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। नई लाइन बिछने से संचरण क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के कड़े उपाय
केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक वन स्वीकृति के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी आएगी। केंद्र सरकार ने यह वन स्वीकृति पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा की सख्त शर्तों के साथ दी है:
- क्षतिपूरक वनीकरण: जंगल को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए घाटशिला रेंज के रघुनाथडीह गांव में 10 हेक्टेयर खराब वन भूमि (डिग्रेडेड फॉरेस्ट लैंड) को चिह्नित किया गया है। यहां परियोजना के खर्च पर स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।
- पक्षियों की सुरक्षा: तारों से पक्षियों को टकराने से रोकने के लिए विशेष 'बर्ड डिफ्लेक्टर' लगाए जाएंगे।
- हाथियों व वन्यजीवों का बचाव: जंगली हाथियों और अन्य जानवरों को बिजली के झटकों से सुरक्षित रखने के लिए टावरों के निचले हिस्से (बेस) पर मजबूत चेन-लिंक फेंसिंग अनिवार्य की गई है।
विश्व बैंक समर्थित आधुनिक बिजली ढांचा
झारखंड के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को आधुनिक और सशक्त बनाने के लिए विश्व बैंक ने 2018 में इस व्यापक परियोजना को स्वीकृति दी थी।
इसका मूल लक्ष्य राज्य की सरकारी बिजली कंपनियों की परिचालन क्षमता में सुधार करना और ढांचागत आधार को मजबूत करना है।
चाकुलिया-बहरागोड़ा लाइन को फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलना राज्य के बिजली बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।