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जमशेदपुर में गैंगस्टर Prince Khan के शूटर के बाद अजीत-मोहन की भी आई शामत, पैर में लग रही पुलिस की गोली

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:30 AM (IST)

जमशेदपुर में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने की घटनाओं का एक विशेष पैटर्न ...और पढ़ें

बुधवार तड़के हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस मुठभेड़ में आरोपित अजीत मंडल और मोहन यादव पैर में गोली लगने से घायल हो गए। (AI Generated Image)

बुधवार तड़के हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस मुठभेड़ में आरोपित अजीत मंडल और मोहन यादव पैर में गोली लगने से घायल हो गए। (AI Generated Image)

HighLights

  1. जमशेदपुर में पुलिस मुठभेड़ों में पैर में गोली लगने का पैटर्न।

  2. बिंदल मॉल फायरिंग के आरोपित अजीत-मोहन मुठभेड़ में घायल।

  3. पुलिस का दावा: आत्मरक्षा में काबू करने को 'लेग शॉट' रणनीति।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जमशेदपुर में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की आक्रामक कार्रवाई के बीच एनकाउंटर का एक विशेष पैटर्न शहर में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। 
 
हाल के महीनों में हुई कई मुठभेड़ों में पुलिस की गोली अपराधियों के पैर में लगी है, जिसके बाद आरोपित घायल अवस्था में गिरफ्तार किए गए।
 
ताजा मामला सोनारी स्थित बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट फायरिंग कांड से जुड़ा है। बुधवार तड़के हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस मुठभेड़ में आरोपित अजीत मंडल और मोहन यादव पैर में गोली लगने से घायल हो गए।
 

हथियार छीनकर भागने के प्रयास में चली गोली 

पुलिस के अनुसार, हथियार बरामदगी के दौरान दोनों आरोपितों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर फायरिंग करने का प्रयास किया था।
 
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अजीत के बाएं और मोहन के दाएं पैर में गोली लगी। दोनों को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
 
इससे पहले सिदगोड़ा के चर्चित राहुल सिंह उर्फ राहुल बच्चा हत्याकांड के मुख्य आरोपित साहेब उर्फ 'शब्बे' को भी हथियार बरामदगी के दौरान मुठभेड़ में पैर में गोली लगी थी। शब्बे ने भी पुलिस टीम पर गोली चलाकर भागने की कोशिश की थी।
 

एक के बाद एक कई मुठभेड़ों में दोहराया गया पैटर्न 

जमशेदपुर में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ का यह ढर्रा पिछले कई मामलों में देखने को मिला है: 
  • जून 2026: सिदगोड़ा में चेन स्नैचिंग गिरोह के बदमाश हरपाल सिंह उर्फ गबरू के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें वह पैर में गोली लगने से घायल हुआ।
  • 30 जनवरी 2026: बिष्टुपुर के चर्चित कैरव गांधी अपहरण कांड में हथियार बरामदगी के दौरान तीन आरोपित पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए थे, जिनमें रमीज की जांघ में गोली लगी थी।
  • अक्टूबर 2025: कारोबारी हरेराम सिंह के घर हुई फायरिंग के आरोपितों के साथ मध्यरात्रि में मुठभेड़ के दौरान एक अपराधी पैर में गोली लगने से घायल हुआ था।
  • अन्य मामले: धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के शूटर रवि महानंद उर्फ गोपला और सिदगोड़ा में ही चेन स्नेचिंग के एक अन्य आरोपित को भी पुलिस ने पैर में गोली मार कर दबोचा था।
 

पुलिस की सफाई: मकसद मारना नहीं, काबू में करना 

लगातार सामने आ रहे इन मामलों पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मरक्षार्थ की गई मुठभेड़ का उद्देश्य अपराधी की जान लेना नहीं, बल्कि उसे पंगु बनाकर काबू में करना होता है। 
 
परिस्थितियों के अनुसार ही नियंत्रित फायरिंग (Leg Shot) की जाती है और प्रत्येक घटना के बाद नियमानुसार वैधानिक जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। 
 
हालांकि, बिंदल मॉल कांड के बाद जमशेदपुर पुलिस की इस 'सटीक लेग शॉट' रणनीति पर प्रशासनिक व सामाजिक हलकों में सवाल और चर्चाएं तेज हो गई हैं।