चांडिल में सरकारी तालाब पर भूमाफिया का कब्जा, 62 डिसमिल 'खेकड़े तालाब' पर बने आलीशान मकान
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज चांडिल के तमोलिया पंचायत का 62 डिसमिल 'खेकड़े तालाब' अतिक्रमण का शिकार होकर गायब हो गया है, जिस पर अब पक्के मकान बन चुके हैं। ...और पढ़ें

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HighLights
सरकारी रिकॉर्ड में तालाब, जमीन पर बने पक्के मकान।
जल संरक्षण योजनाओं पर अतिक्रमण से उठे गंभीर सवाल।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। एक ओर सरकार जल संरक्षण और जलस्तर को सुधारने के लिए अमृत सरोवर और तालाब जीर्णोद्धार जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
वहीं दूसरी ओर, यदि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तालाब ही धरातल से गायब होने लगें और अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाएं, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
चांडिल अंचल क्षेत्र के आसनबनी (फदलोगोड़ा) में सरकारी तालाब, नाला और सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि तमोलिया पंचायत से आए एक नए मामले ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कागजों में तालाब, जमीन पर आलीशान मकान
स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है कि तमोलिया पंचायत का एक पुराना सरकारी तालाब वर्षों पहले ही भूमाफिया और अतिक्रमणकारियों द्वारा भर दिया गया, जहां अब पक्के मकान और स्थायी निर्माण खड़े हो चुके हैं।
ग्रामीणों के अनुसार:
स्थान: मौजा तमोलिया (थाना नंबर 333)
अभिलेख: खाता नंबर 205, प्लॉट नंबर 699
रकबा: 62 डिसमिल सरकारी भूमि
पहचान: इसे स्थानीय लोग 'खेकड़े तालाब' के नाम से जानते थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज इतना बड़ा जलस्रोत जमीन से आखिर कैसे गायब हो गया और संबंधित राजस्व विभाग ने समय रहते इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
बहरहाल, आसनबनी मौजा के फदलोगोड़ा टोला में सरकारी तालाब में अवैध रूप से मिट्टी भरने के मामले में अंचल प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए एक व्यक्ति को नोटिस जारी किया है।
लेकिन इसी स्थल पर सार्वजनिक रास्ते और नाले पर किए गए कथित अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की चुप्पी रहस्यमयी और लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
जब सरकार पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए नए-नए गड्ढे और तालाब बनवा रही है, तब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पुराने और पारंपरिक तालाबों को बचाने की जिम्मेदारी आख़िर कौन निभाएगा?
यदि अतिक्रमण इसी रफ्तार से जारी रहा, तो जल संरक्षण की तमाम योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी। अंचल प्रशासन को इस पर अविलंब उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए।