ISL से बाहर हुई JFC: मझधार में खिलाड़ियों का करियर, छलके आंसू; टाटा स्टील ने जमशेदपुर एफसी से खींचा हाथ
JFC Withdrawal from ISL: टाटा स्टील ने लागत में कटौती के तहत अपनी फुटबाल फ्रेंचाइजी जमशेदपुर एफसी को इंडियन सुपर लीग से हटाने का फैसला किया है। इस अप् ...और पढ़ें

टाटा स्टील ने जमशेदपुर एफसी को ISL से हटाया, भारतीय फुटबाल को बड़ा झटका।
HighLights
टाटा स्टील ने लागत कटौती के चलते जमशेदपुर एफसी को आइएसएल से हटाया।
डूरंड कप के बीच अचानक हटने के फैसले से कोच, खिलाड़ी और 50 से अधिक स्टाफ हैरान।
इस फैसले से भारतीय फुटबाल जगत और जेएफसी के प्रशंसकों में निराशा।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। हरी घास पर पसीने से सींचे गए सुनहरे सपने जब कारपोरेट के बही-खातों तले रौंदे जाते हैं, तो सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि पूरे शहर की धड़कन रुक जाती है। इस्पात नगरी जमशेदपुर के लिए शुक्रवार की यह शाम किसी खौफनाक दुस्वप्न जैसी रही।
जिस जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को यहां के जुनूनी दर्शक अपने हुजूम और जोश से धधकती भट्ठी (द फर्नेस) बना देते थे, वहां अब एक सर्द और खौफनाक सन्नाटा पसर गया है। टाटा स्टील द्वारा जमशेदपुर एफसी (जेएफसी) को बंद करने का फैसला उस आंधी की तरह आया है, जिसने खिलाड़ियों के भविष्य के आशियाने को तिनके की तरह बिखेर दिया है।
खिलाड़ियों की आंखों में तैरते बेबसी के आंसू और फैंस का टूटता गुरूर बता रहा है कि यह केवल एक फ्रेंचाइजी का अंत नहीं, बल्कि अनगिनत उम्मीदों की चिता है। बीच समंदर में बिना पतवार के डूबते जहाज के मुसाफिरों की तरह, खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ अपने उजड़ते करियर को बस लाचारी से निहार रहे हैं।
आदिवासी बहुल इस अंचल के लिए फुटबाल महज एक खेल नहीं, बल्कि जिंदगी का उत्सव था। जेएफसी का रातों-रात इस तरह इतिहास के पन्नों में दफन हो जाना, भारतीय फुटबाल के आकाश पर लगा ऐसा ग्रहण है, जिसकी कालिमा छंटने में शायद कई दशक लग जाएंगे।
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टाटा स्टील ने खर्चों में कटौती (कास्ट कटिंग) के तहत अपनी प्रतिष्ठित फुटबाल फ्रेंचाइजी जमशेदपुर एफसी (जेएफसी) को इंडियन सुपर लीग (आइएसएल) से हटाने का कड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार शाम क्लब ने आधिकारिक बयान जारी कर 2026-27 सीजन से आइएसएल में भाग नहीं लेने की पुष्टि कर दी।
इसके साथ ही आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन (एआइएफएफ) को भी टीम के हटने की औपचारिक सूचना सौंप दी गई। इस अप्रत्याशित फैसले से लौहनगरी के खेल प्रेमियों सहित पूरे भारतीय फुटबाल जगत को करारा झटका लगा है।
क्लब ने अपने आधिकारिक बयान में 2017 से शुरू हुए इस शानदार सफर के लिए खिलाड़ियों, कोच और स्टाफ को धन्यवाद दिया है। प्रबंधन ने जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को द फर्नेस बनाने वाले जुनूनी दर्शकों का विशेष आभार जताया।
हालांकि, बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि जेएफएसपीएल (जमशेदपुर फुटबाल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड) भारतीय फुटबाल के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रासरुट लेवल पर युवा प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का काम पहले की तरह जारी रहेगा।
फंड का अभाव और बढ़ता जुर्माना बना कारण
पर्दे के पीछे आइएसएल से हटने का मुख्य कारण वित्तीय संकट और नया ढांचा है। आइएसएल में खेलने के लिए सभी टीमों को 1.10 करोड़ रुपये की फीस देनी थी। नियमों के मुताबिक 15 जुलाई तक 55 लाख और 31 जुलाई तक शेष 55 लाख जमा करने थे।
सूचीबद्ध कंपनी होने के कारण प्रबंधन ने अनुपालन प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए 31 जुलाई तक की मोहलत मांगी थी। पहली किश्त न दे पाने पर एआइएफएफ ने क्लब पर प्रतिदिन एक लाख रुपये का भारी जुर्माना लगा दिया था।
गुरुवार को टाटा स्टील बोर्ड की बैठक में जेएफसी के फंड को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई, जिसके बाद टीम को लीग से बाहर खींचने का अंतिम निर्णय लिया गया।
स्टाफ-खिलाड़ी निराश और हैरान
इस बंदी का सीधा असर क्लब से जुड़े 50 से अधिक अधिकारियों, कोच और सहायक स्टाफ पर पड़ा है। शुक्रवार को सभी कर्मचारियों को इसकी औपचारिक सूचना दे दी गई। जेएफसी के सीईओ मुकुल चौधरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि टीम फिलहाल प्रतिष्ठित डूरंड कप में हिस्सा ले रही है। टूर्नामेंट के बीच में आए इस फैसले ने विदेशी खिलाड़ियों और मुख्य कोच ओवेन कोएल सहित पूरे खेमे का मनोबल तोड़ दिया है।
जेएफसी बंद होने पर भड़के खिलाड़ी, कहा- करियर बर्बाद
अचानक बंद करने के फैसले ने टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को गहरे सदमे में डाल दिया है। शुक्रवार शाम कदमा स्थित जेएफसी फ्लैटलेट्स में प्रबंधन ने जैसे ही इस मनहूस खबर की आधिकारिक सूचना दी, वहां का माहौल पूरी तरह से गमगीन और तनावपूर्ण हो गया।
अप्रत्याशित खबर सुनकर जहां कई खिलाड़ियों की आंखों से आंसू छलक पड़े, वहीं कुछ खिलाड़ी गुस्से से उबल पड़े। खिलाड़ियों ने प्रबंधन पर उनका करियर बीच मझधार में तबाह करने का गंभीर आरोप लगाया है।
पूछ रहे- हम जाएं तो कहां जाएं
खिलाड़ी इंडियन सुपर लीग (आइएसएल) का नया सीजन सिर पर है और खिलाड़ियों का ट्रांसफर सीजन (खिलाड़ियों के दल-बदल का समय) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसे नाजुक वक्त में टीम बंद होने से खिलाड़ी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
गुस्से में तमतमाए पेशेवर खिलाड़ियों ने प्रबंधन को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा, 'आपने हमारा करियर पूरी तरह बर्बाद कर दिया। अगर टीम बंद ही करनी थी, तो ट्रांसफर विंडो शुरू होने से पहले यह निर्णय लेना था। अब लगभग सभी टीमों ने अपने कोटे के खिलाड़ी चुन लिए हैं, ऐसे में हम जाएं तो कहां जाएं?'
मौके पर मौजूद प्रबंधन के अधिकारियों के पास इन तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं था। दो साल के अनुबंध में फंसे कई दिग्गज और कोच इस निर्मम फैसले की सबसे तगड़ी मार उन खिलाड़ियों पर पड़ी है, जिनका क्लब के साथ दो साल का पक्का अनुबंध (एग्रीमेंट) था।ये खिलाड़ी पिछले सीजन में अपना एक साल पूरा कर चुके थे और उन्हें इस सीजन में अपना दूसरा साल खेलना था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टीम के मजबूत भारतीय डिफेंडर प्रतीक चौधरी, बेहतरीन मिडफील्डर इमरान खान, प्रतिभावान गोलकीपर अमृत गोप और एमिल बेनी जैसे कई प्रमुख खिलाड़ी इसी कानूनी पेंच में फंस गए हैं। यही नहीं, टीम के मुख्य कोच ओवेन कोएल का भी जेएफसी के साथ दो साल का अनुबंध था, जिसका एक साल अभी बाकी है।
रोजी-रोटी की फिक्र में डूबा सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों के साथ-साथ पर्दे के पीछे दिन-रात काम करने वाला पूरा सपोर्ट स्टाफ और आफिस के कर्मचारी भी इस फरमान से गहरे सदमे में हैं। रातों-रात बेरोजगार हुए इन दर्जनों कर्मचारियों के सामने अब अपने परिवार के भरण-पोषण और भविष्य का भारी संकट खड़ा हो गया है।
जमशेदपुर एफसी पर ताला, इंटरनेट मीडिया पर मचा हड़कंप
जेएफसी को इंडियन सुपर लीग (आइएसएल) से हटाने और टीम को बंद करने के फैसले से इंटरनेट मीडिया पर हड़कंप मच गया है। फुटबाल फैंस इसे भारतीय फुटबाल के लिए दुखद दिन करार देते हुए गहरी निराशा जता रहे हैं।
फैंस का सीधा आरोप है कि कंपनी प्रबंधन और भारतीय फुटबाल ने देश के सबसे जुनूनी फैनबेस को निराश किया है। क्लब की खासियतें याद कर भावुक हुए फैंस एक्स (पूर्व ट्विटर) और अन्य प्लेटफार्म पर जेएफसी को लेकर प्रतिक्रियाओं का बाढ़ आ गई है।
मुश्ताक नामक एक खेल प्रेमी ने लिखा, टाटा ग्रुप ऐसा क्यों कर रहा है? यह भारत का इकलौता क्लब है जिसका अपना स्टेडियम और शानदार अकादमी है। ऋषि ने लिखा कि फैंस हर सीजन में टीम के साथ मजबूती से खड़े रहे, वे इससे बेहतर के हकदार थे।
फैंस का गुस्सा आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन (एआइएफएफ) पर भी फूट रहा है। लोगों का मानना है कि क्लब प्रबंधन भारतीय फुटबाल की वर्तमान कार्यप्रणाली और ढांचे से खुश नहीं था, जिसके कारण यह अप्रत्याशित नौबत आई।
आइएसएल के भविष्य और युवा प्रतिभाओं पर चिंता
फैंस ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दो शील्ड विजेता टीमें अब अस्तित्व में नहीं रहेंगी। इंटरनेट मीडिया पर अब आइएसएल में 14 टीमों की संख्या बरकरार रखने को लेकर भी बहस छिड़ गई है।
खेल विशेषज्ञ और फैंस मांग कर रहे हैं कि लीग को बचाने के लिए एआइएफएफ मोहम्मडन एससी को रेलिगेट न करे या फिर शिलांग को प्रमोट करे। 13 टीमों के साथ लीग खेलना किसी भी सूरत में विकल्प नहीं होना चाहिए।
हालांकि, कुछ फुटबॉल फैंस अब भी उम्मीद जता रहे हैं कि क्लब पूरी तरह बंद होने के बजाय डूरंड कप या स्टेट लीग में अपनी भागीदारी जारी रखेगा।