Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ISL में आर्थिक संकट! जमशेदपुर FC समेत क्लबों ने घटाई खिलाड़ियों की सैलरी; करोड़ों कमाने वाले फुटबॉलर भी हुए प्रभावित

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 03:17 PM (GMT+05:30)

    इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में वित्तीय संकट के कारण भारतीय फुटबॉलरों के वेतन में भारी कटौती की गई है, जिससे शीर्ष खिलाड़ियों की सैलरी 70 लाख से 1.5 करोड ...और पढ़ें

    भारतीय फुटबॉलरों के वेतन में भारी कटौती।

    भारतीय फुटबॉलरों के वेतन में भारी कटौती।

    HighLights

    1. भारतीय फुटबॉलरों के वेतन में भारी कटौती, वित्तीय संकट गहराया।

    2. प्रसारण और प्रायोजन राजस्व में गिरावट, क्लबों पर दबाव।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। देश की सबसे बड़ी घरेलू फुटबॉल लीग इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में गहराए वित्तीय संकट के बाद क्लबों ने अपने बजट में भारी कटौती की है। इसके तहत बंगाल के क्लबों को छोड़कर जमशेदपुर एफसी समेत बाकी सभी टीमों ने भारतीय फुटबालरों की सैलरी काफी कम कर दी है।

    इसके चलते जो शीर्ष भारतीय खिलाड़ी पहले सालाना 70 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक कमाते थे, उनकी सैलरी अब घटकर 20 से 70 लाख रुपये के दायरे में सिमट गई है।

    प्रसारण और प्रायोजन राजस्व में गिरावट

    फुटबॉल जगत के सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय प्रायोजन राजस्व में आई भारी कमी और वाणिज्यिक अधिकारों की अनिश्चितता के कारण क्लब गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

    अधिकांश क्लबों का लगभग 60 से 70 प्रतिशत बजट केवल खिलाड़ियों के वेतन पर खर्च होता था, जिसे मौजूदा हालात में वहन करना प्रबंधन के लिए बेहद मुश्किल हो गया था। इस गंभीर वित्तीय असंतुलन से बचने और क्लबों को बंद होने से बचाने के लिए प्रबंधन को वेतन कटौती का यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है।

    सस्ते और उपयोगी विदेशी खिलाड़ियों की तलाश

    बजट में इस कटौती का असर केवल भारतीय खिलाड़ियों पर ही नहीं, बल्कि विदेशी खिलाड़ियों की भर्ती पर भी दिखने लगा है। क्लब अब भारी-भरकम फीस वाले विदेशी फुटबॉलरों के बजाय कम बजट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले वैल्यू फार मनी खिलाड़ियों की खोज कर रहे हैं।

    सीमित संसाधनों के बीच अधिकतम परिणाम हासिल करने के लिए ट्रांसफर मार्केट की रणनीति पूरी तरह बदल गई है। यही कारण है कि रांची में चल रहे डूरंड कप के लिए जमशेदपुर एफसी ने सस्ते खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया है।

    खबरें और भी

    बंगाल के क्लब बने अपवाद

    इस आर्थिक बदलाव के बीच केवल पश्चिम बंगाल के प्रमुख क्लब अपवाद साबित हुए हैं, जिन्होंने फिलहाल अपने खिलाड़ियों के वेतन ढांचे में बड़ी कटौती से परहेज किया है।

    खेल विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय फुटबाल ट्रांसफर मार्केट में आया यह ऐतिहासिक बदलाव क्लबों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और लंबे समय में खेल के बुनियादी ढांचे को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम साबित हो सकता है।