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    जमशेदपुर की इंकैब इंडस्ट्रीज के दिन फिरेंगे: कर्मचारियों व लेनदारों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 06:44 PM (IST)

    नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने जमशेदपुर की इंकैब इंडस्ट्रीज के पुनरुद्धार में आ रही कानूनी अड़चनें दूर कर दी हैं, जिससे कर्मचारियों और ले ...और पढ़ें

    ट्रॉपिकल वेंचर्स की याचिका खारिज होने के बाद वेदांता के रेजोल्यूशन प्लान के तहत 30 दिनों के भीतर राशि वितरित करने का निर्देश दिया गया है।

    ट्रॉपिकल वेंचर्स की याचिका खारिज होने के बाद वेदांता के रेजोल्यूशन प्लान के तहत 30 दिनों के भीतर राशि वितरित करने का निर्देश दिया गया है।

    HighLights

    1. NCLAT ने इंकैब के फंड वितरण पर रोक हटाई।

    2. कर्मचारियों और लेनदारों को बकाया भुगतान का मार्ग प्रशस्त।

    3. वेदांता के अधिग्रहण से कंपनी के पुनरुद्धार की उम्मीद।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जमशेदपुर की दशकों से बंद पड़ी इंकैब इंडस्ट्रीज (केबुल कंपनी) के पुनरुद्धार की राह में आ रहीं कानूनी अड़चनें अब समाप्त होने की कगार पर हैं। 
     
    नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की दिल्ली पीठ ने ट्रॉपिकल वेंचर्स कंपनी लिमिटेड की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने वेदांता लिमिटेड के रेजोल्यूशन प्लान के तहत फंड वितरण पर रोक लगाने की मांग की थी। 
     
    ट्रिब्यूनल के इस फैसले से इंकैब के हजारों पूर्व कर्मचारियों और लेनदारों (क्रेडिटर्स) को उनकी बकाया राशि मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
     

    सुप्रीम कोर्ट में अपील का दिया था हवाला 

    ट्रॉपिकल वेंचर्स ने अपनी अर्जी में दलील दी थी कि NCLAT के 30 जून के फैसले के खिलाफ उसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
     
    कंपनी की मांग थी कि जब तक उसके 295 करोड़ रुपये के दावे पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक रेजोल्यूशन प्लान के तहत मिलने वाली राशि को एक ब्याज वाले सुरक्षित खाते में रखा जाए। 
     
    ट्रॉपिकल ने 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस का भी हवाला दिया था, लेकिन अपीलेट ट्रिब्यूनल ने इसे फंड वितरण रोकने का पर्याप्त आधार नहीं माना।
     

    30 दिनों में राशि बांटने का निर्देश 

    कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस योगेश खन्ना, तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा और अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने याचिका को भ्रामक करार दिया।
     
    पीठ ने स्पष्ट किया कि 30 जून के फैसले में ट्रॉपिकल के दावे को पहले ही 85.79 करोड़ रुपये पर सीमित (क्रिस्टलाइज) किया जा चुका है।
     
    अदालत ने मॉनिटरिंग कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह एस्क्रो खाते में जमा राशि का वितरण 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करे।
     
    ट्रिब्यूनल ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने फंड वितरण पर कोई स्टे (रोक) नहीं लगाया है, तो अपीलेट ट्रिब्यूनल के लिए अपने ही पूर्व के स्पष्ट आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
     

    CoC के प्रस्ताव पर प्रतिवादियों का तर्क 

    सुनवाई के दौरान ट्रॉपिकल ने कर्जदाताओं की समिति (CoC) की 22वीं बैठक के उस प्रस्ताव का जिक्र किया, जिसमें विवादित दावों की राशि को सुरक्षित रखने की बात कही गई थी। 
     
    हालांकि, प्रतिवादियों (वेदांता व अन्य) ने तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल पहले ही ट्रॉपिकल को इंकैब की अचल संपत्तियों के मामले में सिक्योर्ड क्रेडिटर मानने से इनकार कर चुका है। सभी पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने माना कि वितरण प्रक्रिया में और देरी करना अनुचित है।
     

    कर्मचारियों और शहर में जगी नई उम्मीद 

    शहर की ऐतिहासिक इंकैब इंडस्ट्रीज के लिए वेदांता लिमिटेड का आगमन एक नई संजीवनी साबित हो रहा है। वेदांता ने पिछले वर्ष दिसंबर में 545 करोड़ रुपये के अधिग्रहण प्रस्ताव के साथ इस कंपनी की कमान संभाली थी। 
     
    हाल ही में वेदांता ने मानवीय आधार पर कर्मचारियों के बकाया वेतन के मद में 45 करोड़ रुपये जारी किए थे। अब कानूनी बाधाएं दूर होने से इंकैब को पुनर्जीवित करने और इसे एक वैश्विक इलेक्ट्रिकल हब बनाने की योजना को तीव्र गति मिलेगी।

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