दलमा में माओवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन, आकाश और सचिन की तलाश तेज
पूर्वी सिंहभूम के दलमा के घने जंगलों में एक करोड़ के इनामी माओवादी आकाश और 15 लाख के इनामी सचिन की तलाश में 300 से अधिक जवानों ने बड़ा सर्च ऑपरेशन शुर ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
दलमा में 300 से अधिक जवानों का बड़ा सर्च ऑपरेशन।
एक करोड़ के इनामी माओवादी आकाश की तलाश जारी।
कोबरा और झारखंड जगुआर बल अभियान में शामिल।
मनोज सिंह, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम के दलमा के घने जंगल अब निर्णायक नक्सल उन्मूलन अभियान के केंद्र बन गए हैं।
पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा से दबाव के बाद यहां शरण लेने की सूचना पर एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन की तलाश में शुक्रवार तड़के कोबरा और झारखंड जगुआर के 300 से अधिक जवानों ने अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
सुरक्षा एजेंसियों ने दलमा के जंगलों की घेराबंदी कर दी है और सभी संभावित रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पहाड़ी से सटे झारखंड -बंगाल सीमा को सील कर दिया गया है।
सारंडा में दबाव, दलमा में पनाह
पिछले कुछ महीनों से सारंडा और कोल्हान के जंगलों में चल रहे ऑपरेशन मेधाबुरु समेत अन्य संयुक्त अभियानों ने माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका दिया है।
हालिया मुठभेड़ों में एक करोड़ के इनामी अनल दा समेत कई बड़े नक्सली मारे जा चुके हैं। इसी दबाव के बाद खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली है कि आकाश और सचिन ने झारखंड-बंगाल सीमा से सटे बोड़ाम, पटमदा और सरायकेला-खरसावां के सीमावर्ती दलमा जंगलों में ठिकाना बना लिया है।
पहली बार इतनी बड़ी घेराबंदी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार दलमा में इस स्तर का अभियान पहली बार चलाया जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र को लंबे समय से माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है।
अभियान में कोबरा, झारखंड जगुआर और अन्य सुरक्षा बल अत्याधुनिक हथियारों के साथ जंगल के चप्पे-चप्पे की तलाशी ले रहे हैं।
नक्सली नेटवर्क को लग सकता है अंतिम झटका
अधिकारियों का मानना है कि यदि इस अभियान में आकाश और सचिन पकड़े जाते हैं या मारे जाते हैं, तो पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को सबसे बड़ा झटका लगेगा और क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर निर्णायक असर पड़ेगा।
पुलिस ने माओवादियों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी अभियान के दौरान सशस्त्र प्रतिरोध किया गया तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खबरें और भी
क्यों खास है कोबरा?
- सीआरपीएफ की विशेष कोबरा इकाई अभियान में शामिल।
- घने जंगलों और गुरिल्ला युद्ध में विशेषज्ञ कमांडो।
- छिपे हुए उग्रवादियों के खिलाफ सटीक और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित।
- देश के सबसे सफल एंटी-नक्सल अभियानों में कोबरा की अहम भूमिका रही है।