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    चांडिल बांध का जलस्तर 180 मीटर पहुंचा: खोले गए 6 रेडियल गेट, डूब क्षेत्र के विस्थापितों में बढ़ी चिंता

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 11:08 PM (GMT+05:30)

    चांडिल बांध का जलस्तर 180 मीटर पहुंचने पर 6 रेडियल गेट खोले गए हैं, जिससे डूब क्षेत्र के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। विस्थापित ग्रामीण जलस्तर को नि ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।(AI Generated Image)

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।(AI Generated Image)

    HighLights

    1. सुरक्षा हेतु 6 रेडियल गेट आधा मीटर खोले गए।

    2. डूब क्षेत्र के ग्रामीणों को पुनर्वास न मिलने से चिंता।

    जागरण संवाददाता, चांडिल। स्वर्णरेखा परियोजना के अंतर्गत आने वाले चांडिल बांध का जलस्तर शनिवार को बढ़कर 180 मीटर तक पहुंच गया। 
     
    जलस्तर के इस सीमा पर पहुंचते ही बांध की सुरक्षा और जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए 13 में से 6 रेडियल गेटों को आधा-आधा मीटर खोल दिया गया है। 
     
    इसके अलावा डैम के 2 स्यूलिस गेट भी पहले से खुले हुए हैं। गेट खोले जाने के बाद फिलहाल डैम का जलस्तर स्थिर बना हुआ है।
     

    डूब क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत, और गेट खोलने की मांग

    डैम का जलस्तर 180 मीटर पहुंचते ही डूब क्षेत्र में रहने वाले विस्थापितों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मूसलाधार बारिश की स्थिति में गांवों में पानी घुसने का खतरा बन जाता है। 
     
    विस्थापितों ने प्रशासन से मांग की है कि जलस्तर को सुरक्षित सीमा में नियंत्रित रखने के लिए और अधिक रेडियल गेट खोले जाएं।
     

    180 मीटर जलस्तर बनाए रखने का निर्णय

    प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष मानसून की शुरुआत से ही जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए समय-समय पर रेडियल गेट खोले जा रहे हैं। 
     
    इस वर्ष डैम का अधिकतम जलस्तर 180 मीटर तक ही सीमित रखने का फैसला लिया गया है, क्योंकि इससे अधिक पानी बढ़ने पर सीधे तौर पर तटीय व डूब क्षेत्र के गांवों में पानी प्रवेश करने लगता है।
     

    पुनर्वास न मिलने से हर साल झेलनी पड़ती है त्रासदी

    चांडिल डैम के डूब क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार निवास कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अब तक संपूर्ण मुआवजा और उचित पुनर्वास की सुविधा नहीं मिल पाई है, जिसके कारण वे जोखिम भरे इलाकों में रहने को मजबूर हैं। 
     
    हर साल जलभराव के कारण घरों में पानी घुस जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है और मजबूरन सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है।