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बहरागोड़ा के बांस शिल्प की देश भर में बढ़ी मांग, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार का बना बेहतरीन मॉडल

Published: Sat, 22 Aug 2026 06:00 AM (IST)

जमशेदपुर के बहरागोड़ा में वन विभाग द्वारा संचालित बंबू यूनिट पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक डिजाइनों के साथ नई पहचान ...और पढ़ें

बंबू यूनिट पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक डिजायनों के साथ एक नई पहचान दिला रही है।

बंबू यूनिट पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक डिजायनों के साथ एक नई पहचान दिला रही है।

HighLights

  1. बहरागोड़ा की बंबू यूनिट पारंपरिक बांस शिल्प को दे रही नई पहचान।

  2. जीआई टैग प्राप्त बांस से बनते हैं आधुनिक और आकर्षक उत्पाद।

  3. स्थानीय कारीगरों को मिल रहा रोजगार, पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जिले के बहरागोड़ा स्थित वन विश्रामागार परिसर में वन विभाग के सहयोग से संचालित बंबू यूनिट पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक डिजायनों के साथ एक नई पहचान दिला रही है। 
 
यहां जीआई (GI) टैग प्राप्त बांस का उपयोग कर दैनिक जीवन में काम आने वाली और आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा रही हैं। इन उत्पादों की मांग अब केवल झारखंड तक सीमित न रहकर देश के विभिन्न राज्यों में भी लगातार बढ़ रही है। 
 
यह यूनिट स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका और स्वरोजगार का एक मजबूत माध्यम बनने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मिसाल पेश कर रही है।


पारंपरिक कला और आधुनिक डिजायन का अनोखा संगम

बंबू यूनिट में कुशल कारीगरों द्वारा मोबाइल फोन स्पीकर सह पेन स्टैंड, बंबू वॉल क्लॉक, गजेबो, कस्टमाइज्ड गिफ्ट आइटम, टिश्यू पेपर स्टैंड, सोफा, कुर्सी, टेबल और इको-फ्रेंडली बैग सहित कई आधुनिक उत्पाद बनाए जा रहे हैं। 
 
पारंपरिक हस्तकला और आधुनिक आवश्यकताओं के इस अद्भुत मेल ने इन बांस उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिलाई है। यही वजह है कि सरकारी प्रदर्शनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र से भी बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं।


स्थानीय कारीगरों को मिला हुनर और आजीविका का साधन

यूनिट में सेटप हेंब्रम, जादू हेंब्रम, कौशल्या, सुजीत गिरी और छोटू जैसे कई प्रशिक्षित ग्रामीण कारीगर अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। नियमित रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 
 
यूनिट संचालक अमर कुमार ने बताया कि इस केंद्र की स्थापना और संचालन में जमशेदपुर वन प्रमंडल के डीएफओ सबा आलम अंसारी और रेंजर दिग्विजय सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


पर्यावरण सचिव ने भी की सराहना, अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर

वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दिकी ने भी बहरागोड़ा बंबू यूनिट का दौरा कर उत्पादों की नक्काशी और गुणवत्ता की मुक्तकंठ से सराहना की है। 
 
उन्होंने इसे राज्य के लिए एक बेहतरीन आर्थिक मॉडल बताया। विभाग का मुख्य लक्ष्य अब बहरागोड़ा के इस अद्वितीय बांस शिल्प को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है, ताकि स्थानीय शिल्पकारों को वैश्विक पहचान और बेहतर आय मिल सके।

बहरागोड़ा के बांस शिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय कारीगरों के हुनर को बाजार उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है।

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- अमर कुमार, संचालक, बंबू यूनिट