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हजारीबाग में शिक्षकों के प्रतिनियोजन पर उठे सवाल, ‘विशेष परिस्थिति’ के नाम पर कैसे हो रहे आदेश?

Published: Fri, 04 Sep 2026 08:46 AM (IST)

हजारीबाग में प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 'विशेष परिस्थिति' का हवाला देकर शिक्षकों के प्रतिनियोजन पर सवाल उठ रहे हैं। कम ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. विशेष परिस्थिति' का हवाला देकर शिक्षकों का प्रतिनियोजन सवालों में।

  2. कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती।

संवाद सहयोगी, हजारीबाग। हजारीबाग जिले के प्रारंभिक विद्यालयों में इन दिनों प्रतिनियोजन को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से अब तक करीब एक दर्जन शिक्षकों का अगले आदेश तक प्रतिनियोजन किया जा चुका है।

विभागीय आदेश में हर बार विशेष परिस्थिति का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन प्रतिनियोजन की जगह और विद्यालयों की स्थिति देखकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह विशेष परिस्थिति किसके लिए है।

शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई शिक्षकों को ऐसे विद्यालयों में भेजा गया है जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में उनकी जरूरत स्पष्ट नहीं दिखती। दूसरी ओर जिले के सुदूरवर्ती और दुर्गम इलाकों के विद्यालयों में शिक्षक वर्षों से संसाधनों के अभाव में सेवा दे रहे हैं। उन्हें न तो सुगम स्थान पर भेजा जा रहा है और न ही उनकी परेशानियों को विशेष परिस्थिति माना जा रहा है।

जागरण के पास प्रतिनियोजन से जुड़े पांच आदेश मौजूद हैं। मो. मोबारक अंसारी को मध्य विद्यालय झापा, चौपारण से मध्य विद्यालय गिद्दी सी, डाड़ी भेजा गया। रीता गुप्ता को चतरा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पीरी, सिमरिया से 21 अगस्त को कटकमदाग के मध्य विद्यालय कदमा में प्रतिनियोजित किया गया।

सुषमा मिश्रा को भी 21 अगस्त को चतरा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पत्थलगड्डा से हजारीबाग के उत्क्रमित मध्य विद्यालय नवांटांड़ भेजा गया। इसी तरह उमेश कुमार मेहता को रामगढ़ के प्राथमिक विद्यालय पटेलनगर, पतरातू से 22 जनवरी को नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दीपूगढ़ा में प्रतिनियोजित किया गया।

जानकारी के अनुसार, यहां विद्यार्थियों की संख्या काफी कम है। रंजना कुमारी को चौपारण के प्राथमिक विद्यालय ताजपुर से बीते वर्ष 29 दिसंबर को शहर के मध्य स्थित प्राथमिक विद्यालय शिवपुरी भेजा गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक जरूरत थी तो विभाग ने इसका आकलन किस आधार पर किया।

क्या प्रतिनियोजन से पहले विद्यालयवार छात्र-शिक्षक अनुपात की जांच हुई। यदि हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। और यदि नहीं हुई तो विशेष परिस्थिति के नाम पर आदेश जारी करने का आधार क्या है। ऐसे में शिक्षा विभाग को प्रतिनियोजन की पूरी प्रक्रिया, मानक और आधार सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। वरना विशेष परिस्थिति के नाम पर हो रहे ये आदेश सवालों से बच नहीं पाएंगे। 

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