हजारीबाग में हाथियों को भगाने का हाईटेक तरीका! मोबाइल से 33 गांव में बजेगा सायरन, मधुमक्खी की आवाज करेगी अलर्ट
हजारीबाग वेस्ट डिविजन ने हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए एक अनोखा स्मार्ट अलार्म सिस्टम विकसित किया है। ...और पढ़ें

हजारीबाग में हाथियों को रोकने का पहला हाईटेक प्रयोग। जागरण
HighLights
हजारीबाग में मानव-हाथी संघर्ष रोकने को स्मार्ट अलार्म सिस्टम।
मोबाइल से 33 गांवों में बजेगा सायरन, मधुमक्खी की आवाज।
विकास कुमार, हजारीबाग। जंगल से हाथियों के निकलकर गांव की ओर बढ़ने की सूचना मिलते ही अब ग्रामीणों को हाथ में मशाल लेकर उनका पीछा करने या पटाखे फोड़कर उन्हें भगाने के लिए घरों से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी। मोबाइल के एक क्लिक पर एक साथ 33 गांवों में सायरन गूंज उठेगा।
सायरन के साथ पटाखों और मधुमक्खियों की आवाज तथा तेज रोशनी हाथियों को आबादी से दूर रखने का काम करेगी। मानव-हाथी संघर्ष में ग्रामीणों की जान बचाने और हाथियों को भी सुरक्षित रखने के लिए हजारीबाग वेस्ट डिविजन ने यह अनूठा स्मार्ट अलार्म सिस्टम तैयार किया है।
वन विभाग के अनुसार, झारखंड में पहली बार इस तरह की तकनीक का इतने बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग इसे देश में भी अपनी तरह का पहला प्रयोग मान रहा है। हजारीबाग वेस्ट डिविजन के डीएफओ मौन प्रकाश की पहल पर शुरू किए गए इस प्रयोग में तकनीक को स्थानीय परिस्थितियों और हाथियों के व्यवहार के अनुरूप इस्तेमाल किया गया है।
एक क्लिक और 33 गांवों में खतरे का अलर्ट
बड़कागांव और बरकट्ठा के हाथी प्रभावित एवं संवेदनशील गांवों को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। बरकट्ठा क्षेत्र के 22 गांव इसमें शामिल हैं। इन इलाकों में हाथियों के उत्पात के कारण पहले एक दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कई बार हाथियों को भगाने के दौरान ग्रामीणों और हाथियों का आमना-सामना हो जाता है और यही स्थिति जानलेवा बन जाती है।
इसी चुनौती को देखते हुए वन विभाग ने प्रत्येक चयनित गांव में दो-दो स्मार्ट अलार्म यूनिट स्थापित की हैं। हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम कंट्रोल रूम या मोबाइल के माध्यम से संबंधित गांवों में अलर्ट जारी कर सकती है। जरूरत पड़ने पर 33 गांवों में एक साथ चेतावनी प्रसारित करने की सुविधा भी है।
सायरन के साथ सुनाई देगी मधुमक्खियों और पटाखों की आवाज
स्मार्ट अलार्म सिस्टम को केवल चेतावनी देने तक सीमित नहीं रखा गया है। अलार्म सक्रिय होने पर सायरन के साथ पटाखों और मधुमक्खियों की आवाज सुनाई देगी। साथ ही लाइट भी सक्रिय होगी। इसका उद्देश्य हाथियों को बिना ग्रामीणों के सीधे संपर्क में आए आबादी से दूर रखना है।
हाथियों को भगाने में मधुमक्खियों की आवाज के इस्तेमाल के पीछे वैज्ञानिक आधार भी माना जाता है। हाथी मधुमक्खियों से बचते हैं और उनकी आवाज उन्हें असहज करती है। इसी तरह पटाखों की आवाज और रोशनी का इस्तेमाल भी हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए किया जाता रहा है। अब वन विभाग ने इन पारंपरिक अनुभवों को डिजिटल अलर्ट सिस्टम से जोड़ दिया है।
ग्रामीण नहीं, अब तकनीक करेगी हाथियों को अलर्ट
मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती उस समय पैदा होती है जब हाथियों को देखने के बाद ग्रामीण बड़ी संख्या में उन्हें भगाने के लिए पहुंच जाते हैं। मशाल, पटाखे और शोर के बीच हाथियों के बिदकने का खतरा रहता है। कई घटनाओं में यही आमना-सामना ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हुआ है।
नए सिस्टम में वन विभाग का प्रयास है कि हाथियों के गांव में पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों को चेतावनी मिल जाए। अलर्ट मिलने के बाद लोग सुरक्षित स्थान पर रह सकते हैं और वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधि पर नजर रख सकती है। इससे हाथियों को घेरने, पीछा करने और उनके बेहद करीब जाने की स्थिति को कम किया जा सकेगा।
डीएफओ मौन प्रकाश ने कहा
“मानव-हाथी संघर्ष में सबसे बड़ी चुनौती हाथियों और ग्रामीणों का आमने-सामने आना है। पारंपरिक तरीके से हाथियों को भगाने के दौरान ग्रामीणों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट अलार्म सिस्टम तैयार किया गया है।
हमारा उद्देश्य है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना समय रहते अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचे और ग्रामीण सुरक्षित रहें। साथ ही हाथियों को भी बिना नुकसान पहुंचाए आबादी से दूर किया जा सके। झारखंड में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है और हम इसे बड़े स्तर पर आगे ले जाने की संभावना देख रहे हैं।”
झारखंड से देश के लिए मॉडल बनने की उम्मीद
हजारीबाग वेस्ट डिविजन की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां अलर्ट, आवाज, रोशनी और मोबाइल नियंत्रण को एक ही सिस्टम में जोड़ा गया है। यदि प्रयोग अपेक्षित रूप से सफल रहा तो मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित झारखंड के दूसरे इलाकों के साथ देश के अन्य राज्यों में भी इसे अपनाने की संभावना बन सकती है।
