हजारीबाग में ₹8 करोड़ की लागत से बना ITI कॉलेज बदहाली का शिकार, उद्घाटन के 11 साल बाद भी नहीं शुरू हुई पढ़ाई
हजारीबाग के इचाक प्रखंड में आठ करोड़ की लागत से बना आईटीआई कॉलेज उद्घाटन के बाद भी एक दशक से बंद पड़ा है। देखरेख के अभाव में भवन जर्जर हो रहा है। ...और पढ़ें
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आईटीआई कॉलेज का भवन
HighLights
इचाक के बोगा गांव में 8 करोड़ का आईटीआई कॉलेज।
2015 में उद्घाटन के बाद भी पढ़ाई शुरू नहीं हुई।
देखरेख के अभाव में भवन अब जर्जर हो रहा है।
संवाद सूत्र, हजारीबाग। युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर संस्थान बना रही है, लेकिन कई परियोजनाएं विभागीय उदासीनता के कारण शुरू होने से पहले ही बदहाली का शिकार हो रही हैं।
इचाक प्रखंड के बोगा गांव में करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से बना आईटीआई कॉलेज इसका जीता-जागता उदाहरण है। वर्ष 2015 में भवन निर्माण पूरा होने के बाद इसका उद्घाटन भी कर दिया गया, लेकिन आज तक कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। नतीजतन वर्षों से बंद पड़ा भवन अब देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगा है।
भवन प्रमंडल विभाग की ओर से निर्मित इस कॉलेज से क्षेत्र के लोगों को काफी उम्मीदें थीं। लोगों का मानना था कि कॉलेज शुरू होने पर इचाक और आसपास के ग्रामीण इलाकों के छात्र-छात्राओं को तकनीकी शिक्षा के लिए दूसरे शहरों या राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। लेकिन एक दशक बीतने को है, न तो यहां नामांकन शुरू हुआ और न ही कक्षाएं संचालित हो सकीं।
लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण भवन की खिड़कियां, दरवाजे और अन्य संरचनाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रही हैं। परिसर में भी नियमित देखरेख नहीं होने से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तैयार कर देना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक उसका संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर तैयार संस्थानों का संचालन नहीं हो पाना गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि यदि कॉलेज चालू हो जाए तो क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन भी कम होगा।
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आईटीआई कॉलेज बनने से लोगों में काफी खुशी थी। उम्मीद थी कि गांव के बच्चों को तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन इतने वर्षों बाद भी कॉलेज शुरू नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उमेश कुमार मेहता, मुखिया, बोगा पंचायत
आज के समय में युवा तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रोजगार की ओर बढ़ना चाहते हैं। यदि कॉलेज चालू हो जाता तो आसपास के सैकड़ों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलता और बेरोजगारी कम करने में मदद मिलती।
मुरली प्रसाद मेहता
सरकार ने भवन निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। कॉलेज शुरू होने से गरीब परिवारों के बच्चों को सबसे अधिक सुविधा मिलेगी।
वीरेंद्र कुमार मेहता
हर चुनाव में विकास और रोजगार की बातें होती हैं, लेकिन वर्षों से बंद पड़े आईटीआई कॉलेज की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए।
राजू मेहता
आईटीआई कॉलेज खुलने से प्रखंड के युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। यदि समय रहते कॉलेज का संचालन शुरू नहीं किया गया तो क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।'
अशोक कुमार मेहता