Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    दुमका की महिला कंपनी ने लॉन्च किया 'पलाश' हर्बल गुलाल, गेंदा-गुलाब सहित कई फूलों का किया गया है इस्तेमाल

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 10:07 PM (IST)

    दुमका के रानीश्वर प्रखंड में 'समाज लाहा उत्पादक कंपनी' की महिलाएं होली के लिए शुद्ध हर्बल गुलाल बना रही हैं। 'पलाश' ब्रांड के तहत तैयार यह गुलाल रासाय ...और पढ़ें

    पलाश ब्रांड का गुलाल तैयार।

    पलाश ब्रांड का गुलाल तैयार।

    HighLights

    1. दुमका की महिलाओं ने बनाया 'पलाश' हर्बल गुलाल।

    2. रासायनिक रंगों का सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प।

    3. एक क्विंटल गुलाल पलाश मार्ट पर उपलब्ध है।

    राजीव, दुमका। दुमका के रानीश्वर प्रखंड मे गठित समाज लाहा उत्पादक कंपनी की महिलाएं होली के उत्साह और उमंग को प्राकृतिक विकल्पों से जोड़ने की गंभीर पहल की हैं।

    समाज लाहा कंपनी के निदेशक मंडली में शामिल महिलाएं पहली बार होली में रासायनिक रंग व गुलाल इस्तेमाल करने के बजाए इसके विकल्प में शुद्ध हर्बल गुलाल तैयार किया है।

    कंपनी के माध्यम से तैयार किए गए तकरीबन एक क्विंटल गुलाल अभी दुमका के पलाश मार्ट समेत जिले के सभी 10 प्रखंडों में जेएसएलपीएस में उपलब्ध कराया गया है।

    Palash Brand Herbal Gulal

    पलाश ब्रांड के नाम से तैयार इस गुलाल के 100 ग्राम के पैकेट की कीमत 35 रुपये है। खास बात यह कि इस गुलाल को तैयार करने वाली कंपनी महिलाएं संचालित करती हैं।

    समाज लाहा के नाम से गठित इस कंपनी का गठन वर्ष 2024 में किया गया है। इस कंपनी से तकरीबन 1500 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य है जो तकरीबन हासिल कर लिया गया है।

    Palash Brand Herbal Gulal

    इसमें 300 महिलाएं ने अपनी सदस्यता शुल्क 1000 रुपये करके जमा करा चुकी हैं। यह कंपनी एफपीओ के तहत भी संचालित हो रही है। इसके संचालन के लिए जेएसएलपीएस के माध्यम से तीन लाख रुपये मुहैया कराया गया है।

    अभी इसका टर्न ओवर दो लाख रुपये है। कंपनी की निदेशक मंडली में ऐमली किस्कू, विमला हांसदा, चंपा बास्की, आयशा खातून, ललिता हांसदा शामिल हैं। जबकि इसे सुचारु ढंग से संचालित करने के लिए एक सीए और एक लेखापाल भी हैं।

    ऐसे तैयार किया गया है हर्बल गुलाल

    समाज लाहा की निदेशक विमला हांसदा बताती हैं कि घर की साग, सब्जियों और फूलों से सुरक्षित हर्बल गुलाल और रंग तैयार किया गयाहै। यह न सिर्फ त्वचा के लिए सुरक्षित है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है।

    Palash Brand Herbal Gulal

    विमला हांसदा।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में होली पर बाजारों में केमिकल से बने तरह-तरह के रंग उपलब्ध हैं जिसके उपयोग से त्वचा और सेहत को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है।

    ऐसे में खेतों में उपजी लाल साग, पालक साग, पलाश या टेसू के फूल, गेंदा के फूल, धनिया के पत्ते और चुकंदर जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल कर हर्बल गुलाल और रंग आसानी से बनाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी इस बार एक क्विंटल गुलाल तैयार किया है जिसमें पीला, गुलाबी, हरा और चटक नारंगी शामिल है। कहा कि गुलाल तैयार करने की प्रक्रिया काफी सरल है।

    सबसे पहले जिस भी सब्जी, साग या फूल से रंग तैयार करना है उसे अच्छी तरह साफ करना है। फिर इसे मिक्सी में पीसकर उसका प्राकृतिक रंग निकाला जाता है। पीसने के बाद जो गाढ़ा रंग या पेस्ट तैयार होता है उसे आरारोट या मैदा में मिलाया जाता है।

    इसके बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह फैला कर सुखाया जाता है। सूखने के बाद इसे हाथों से मिक्स किया जाता है और फिर ग्राइंडिंग कर बारीक बनाया जाता है ताकि उसमें मौजूद किसी भी तरह का खुरदरापन या गांठ पूरी तरह खत्म हो जाए और गुलाल चिकना बने।

    खबरें और भी

    अंत में इसमें प्राकृतिक सुगंध मिलाई जाती है और इसके लिए गुलाब, लेमनग्रास या मोगरा फूल की खुशबू का उपयोग किया जाता है।

    रंगों के लिए इनका होता है इस्तेमाल

    1. पीला - गेंदा फूल, पलाश का फूल, हल्दी, बेसन
    2. हरा - पालक साग और धनिया का पत्ता, मेंहदी
    3. गुलाबी - चुकंदर, गुलाब की पंखुरी
    4. नारंगी - गाजर, पलाश के फूल
    5. लाल - अनार का छिलका, गाजर, टमाटर
    6. बैंगनी - जामुन व चुकंदर

    वाकई में यह काफी शानदार पहल है। झारखंड का राजकीय फूल पलाश है। झारखंड के आदिवासी समुदाय के लोग बाहा बगैर रंग के फूल और पानी की होली खेलते हैं। अब दुमका की आदिवासी महिलाएं होली को प्रकृति के संग मनाने के लिए बेहतर हर्बल गुलाल विकल्प के तौर पर तैयार किया है जो पलाश के स्टाल पर जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर उपलब्ध है। यह गुलाल पूर्णतः रसायनमुक्त एवं त्वचा के लिए सुरक्षित है। इसके लिए हम सब प्रकृति के संग होली के उमंग को दोगुना कर सकते हैं।

    -

    अभिजीत सिन्हा, उपायुक्त, दुमका

    होली में ज्यादातर लोग केमिकल से बने रंगों का उपयोग करते हैं। इससे त्वचा संबंधी समस्याएं, एलर्जी, खुजली और अन्य गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। कई मामलों में आंखों और सांस से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं। हर्बल गुलाल का उपयोग इन साइड इफेक्ट्स से बचाता है। प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित होते हैं और कई बार त्वचा को नुकसान पहुंचाने के बजाय फायदा करते हैं। हर्बल गुलाल एक बेहतर विकल्प है और इसे घर में आसानी से बनाया जा सकता है। इससे त्वचा के रूखेपन या पिंपल जैसी समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

    -

    विमला हांसदा, निदेशक, समाज लाहा कंपनी, रानीश्वर