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सांसद-विधायक पर भारी पड़े राज, धनबाद महानगर भाजपा अध्यक्ष श्रवण राय की कुर्सी बरकरार

By Ravi Ranjan Anand Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Fri, 09 Jan 2026 08:07 PM (IST)Updated: Sat, 10 Jan 2026 08:23 AM (IST)

Dhanbad BJP News: धनबाद भाजपा के संगठनात्मक चुनाव में विधायक राज सिन्हा का पलड़ा भारी रहा। उनके समर्थन से श्रवण ...और पढ़ें

सांसद ढुलू महतो, विधायक रागिनी सिंह और विधायक राज सिन्हा। (फाइल फोटो)

सांसद ढुलू महतो, विधायक रागिनी सिंह और विधायक राज सिन्हा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. विधायक राज सिन्हा के समर्थन से श्रवण राय पुनः अध्यक्ष बने।

  2. सांसद ढुलू महतो और रागिनी सिंह के दावे खारिज हुए।

  3. राज सिन्हा की संगठनात्मक पकड़ प्रदेश में मजबूत साबित हुई।

रविरंजन आनंद, धनबाद। Jharkhand BJP News: भाजपा के संगठनात्मक चुनाव में धनबाद के विधायक राज सिन्हा भारी पड़े हैं। विधायक राज सिन्हा अपने समर्थक और धनबाद महानगर अध्यक्ष श्रवण राय की कुर्सी बचाने में सफल रहे हैं।

Shrawan Rai 1

वहीं धनबाद के सांसद ढुलू महतो अपने समर्थक नितिन भट्ट और झरिया की विधायक रागिनी सिंह अपने समर्थक मानस प्रसून को अध्यक्ष बनवाना चाहती थीं। लेकिन दोनों की राय को नजरअंदाज करते हुए भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने श्रवण राय को धनबाद महानगर अध्यक्ष के रूप में एक और कार्यकाल के लिए चुन लिया है। श्रवण राय की दोबारा ताजपोशी से विधायक राज सिन्हा के समर्थकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

बताया जाता है कि झारखंड के सभी जिलाध्यक्षों के नाम प्रदेश स्तर पर करीब दस दिन पहले ही फाइनल हो चुके थे, लेकिन धनबाद महानगर अध्यक्ष की कुर्सी पर पेंच फंसा हुआ था। इसकी वजह यह थी कि महानगर अध्यक्ष को लेकर सांसद ढुलू महतो और विधायक राज सिन्हा के बीच खींचतान चल रही थी। सांसद ढुलू महतो अपने प्रतिनिधि नितिन भट्ट को, जबकि विधायक राज सिन्हा वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रवण राय को दोबारा महानगर अध्यक्ष बनाना चाहते थे।

कुछ दिन पहले प्रदेश इकाई की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने सांसद और पार्टी के सभी स्थानीय विधायकों से रायशुमारी की थी। इस दौरान श्रवण राय, मानस प्रसून, शेखर सिंह और धनेश्वर महतो के नाम सामने आए थे।

रायशुमारी में लगभग श्रवण राय के नाम पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन इसी बीच सांसद ढुलू महतो ने अपने प्रतिनिधि नितिन भट्ट को जिलाध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रख दिया। इससे सांसद और विधायक राज सिन्हा के बीच तनातनी बढ़ गई।

प्रदेश इकाई ने दोनों नेताओं से एक उम्मीदवार पर सहमति बनाने को कहा, लेकिन बात नहीं बन सकी। मामला दिल्ली तक पहुंचा, जिसके बाद जाकर धनबाद महानगर अध्यक्ष के नाम पर अंतिम फैसला हो सका।

सांसद और विधायक दोनों पहुंचे दिल्ली दरबार

सांसद ढुलू महतो अपने प्रतिनिधि नितिन भट्ट को अध्यक्ष बनवाने के लिए करीब 15 से 20 दिन पहले अपने समर्थकों के साथ दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा संगठन और शीर्ष नेतृत्व के कई नेताओं से मुलाकात की, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर वापस लौट आए।

उल्लेखनीय है कि जिलाध्यक्ष बनने के लिए पार्टी का सक्रिय सदस्य होना जरूरी होता है, जबकि नितिन भट्ट इस बार सक्रिय सदस्य भी नहीं बन पाए थे। इसी कारण उनकी दावेदारी कमजोर मानी जा रही थी।

प्रदेश इकाई ने दिया राज सिन्हा का साथ

विधायक राज सिन्हा भी करीब एक सप्ताह पहले दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर धनबाद महानगर अध्यक्ष को लेकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश नेतृत्व राज सिन्हा के पक्ष में था। बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष राज सिन्हा के उम्मीदवार का समर्थन किया। इसका नतीजा यह रहा कि श्रवण राय को एक बार फिर महानगर अध्यक्ष की कुर्सी मिल गई।

संगठन स्तर पर राज सिन्हा की मजबूत पकड़

पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज सिन्हा की पकड़ जिला संगठन से लेकर प्रदेश इकाई तक मजबूत है। इसके उलट स्थानीय सांसद ढुलू महतो संगठनात्मक कार्यों में अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहते हैं। साथ ही जब पार्टी के कोई बड़े पदाधिकारी या नेता धनबाद प्रवास पर आते हैं, तो उनकी मौजूदगी भी सीमित रहती है।

इसी कारण प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर धनबाद महानगर अध्यक्ष के मामले में सांसद की राय को विशेष तवज्जो नहीं दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि इस संगठनात्मक चुनाव में विधायक राज सिन्हा सांसद पर भारी पड़ गए।

वहीं झरिया की विधायक रागिनी सिंह भी चाहती थीं कि मानस प्रसून को अध्यक्ष बनाया जाए, लेकिन उन्होंने सांसद ढुलू महतो की तरह रांची से लेकर दिल्ली तक की दौड़ नहीं लगाई।