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    झरिया की भूमिगत आग पर अब AI और सैटेलाइट की नजर, कोल इंडिया-इसरो में समझौता

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 07:42 AM (GMT+05:30)

    Coal India ने इसरो के साथ मिलकर झरिया की दशकों पुरानी कोयला आग पर निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैटेलाइट डैशबोर्ड विकसित किया है। ...और पढ़ें

    झरिया के कोयले में लगी आग। (फाइल फोटो)

    झरिया के कोयले में लगी आग। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. कोल इंडिया और इसरो ने निगरानी के लिए किया समझौता।

    2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैटेलाइट डैशबोर्ड होगा तैयार।

    3. झरिया की आग, अवैध खनन पर रखी जाएगी नजर।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। झारखंड के धनबाद स्थित झरिया में जमीन के नीचे कोयले में दशकों से सुलग रही आग पर अब अत्याधुनिक तकनीक से नजर रखी जाएगी। देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के साथ समझौता किया है।

    समझौते के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपग्रह डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे देशभर की कोयला खदानों की निगरानी की जा सकेगी। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा झरिया के आग प्रभावित इलाकों को मिलेगा। डैशबोर्ड की मदद से कोयला आग की पहचान, उसके फैलने की संभावना और प्रभावित क्षेत्रों की समय पर निगरानी हो सकेगी।

    इससे आग पर नियंत्रण की योजना बनाने, लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने में मदद मिलेगी।इसके अलावा खदान बंदी, वनरोपण, हरित क्षेत्र, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन और पट्टा क्षेत्र के बाहर होने वाली अवैध खन गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जाएगी।

    परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और पूर्वानुमान विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग होगा।कोल इंडिया का कहना है कि इस पहल से खन की निगरानी अधिक सटीक और पारदर्शी होगी।

    साथ ही पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित खन और आग प्रभावित क्षेत्रों में समय पर कार्रवाई करने में भी बड़ी मदद मिलेगी। झरिया क्षेत्र के लोगों के लिए यह तकनीक राहत और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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