टुंडी में कचरे से ईंधन बनाने का लगेगा प्लांट, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
Tundi Briquetting Plantः झारखंड के टुंडी, धनबाद में कचरे से ईंधन बनाने वाला ब्रिकेटिंग प्लांट स्थापित होगा। यह प्लांट लकड़ी के बुरादे, धान के भूसे और ...और पढ़ें

गादी टुंडी में अतिथिशाला के लिए जमीन का निरीक्षण करते विधायक मथुरा प्रसाद महतो और वन विभाग के अधिकारी।
HighLights
कचरे से ईंधन बनाने वाला ब्रिकेटिंग प्लांट टुंडी में लगेगा।
हजारों ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
पतझड़ के पत्तों का उपयोग कर आय का स्रोत बनेगा।
दिनेश माहथा, टुंडी (धनबाद)। झारखंड के धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड की पहाड़ी तराई क्षेत्र में कचरे से ईंधन बनाने वाला बिकेटिंग प्लांट (Briquetting Plant) स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट में ढीले या बेकार बायोमास/कचरे जैसे लकड़ी का बुरादा, कोयले की धूल, धान का भूसा, गन्ने का बगास और अन्य कृषि अपशिष्ट को दबाकर ठोस ईंधन (ब्रिकेट) बनाया जाएगा।
टुंडी के दुर्गाडीह गांव में इस प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए धनबाद जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। यह जानकारी झारखंड विधानसभा में सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक व टुंडी के विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने दी। उन्होंने बताया कि बिकेटिंग प्लांट के निर्माण से बड़ी संख्या में ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
महतो ने बताया कि टुंडी के जंगलों में पतझड़ के दौरान बड़ी मात्रा में पत्ते गिरते हैं, जो बेकार हो जाते हैं। अब इन पत्तों का उपयोग बिकेटिंग प्लांट में ईंधन बनाने के लिए किया जाएगा। ग्रामीण इन्हें एकत्र कर प्लांट तक पहुंचाएंगे, जिसके बदले उन्हें उचित पारिश्रमिक मिलेगा।
इससे पहाड़ी तराई क्षेत्रों के उन लोगों को आय का नया स्रोत मिलेगा, जो खेती-बाड़ी के बाद खाली समय बिताते हैं। उनके लिए यह प्लांट वरदान साबित होगा। इस प्रक्रिया में पत्तों और अन्य कचरे को मशीन के जरिए उच्च दबाव में दबाकर छोटे-छोटे ठोस गोले या ईंट के आकार (ब्रिकेट) में बदला जाता है।
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इनका उपयोग बॉयलर और भट्ठियों में ईंधन के रूप में, कोयले के विकल्प के तौर पर तथा उद्योगों में हीटिंग के लिए किया जाएगा। मंगलवार को महतो गादीटुंडी पौधशाला में वन विभाग द्वारा 49 लाख रुपये की लागत से बनने वाली नई अतिथि शाला के निर्माण कार्य के लिए जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालिवार के साथ स्थल निरीक्षण करने पहुंचे थे।
इसी दौरान उन्होंने बिकेटिंग प्लांट निर्माण योजना की जानकारी दी। महतो ने कहा कि टुंडी के लोगों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि कई दशकों से बंद पड़ा बेगनोरिया-तिलैया मार्ग, जो लगभग पांच किलोमीटर तक घने जंगल से होकर बरवाअड्डा-राजगंज को जोड़ता है, उसका भी कायाकल्प कर किया जाएगा।
जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालिवार ने बताया कि टुंडी और तोपचांची वन क्षेत्र में कई ऐतिहासिक विकास योजनाओं पर काम एक पखवाड़े के भीतर शुरू किया जाएगा। वन्यजीवों की निगरानी के लिए वॉच टावर और ट्रैक कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही, हाथियों सहित अन्य जंगली जीवों के जल ठहराव के लिए टुंडी पहाड़ और कटहरगढ़ चेकडैम के पास निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
हथिनी अपने बच्चे के साथ क्षेत्र में कर रही विचरण
उन्होंने लोगों से अपील की कि एक हथिनी अपने बच्चे के साथ क्षेत्र में विचरण कर रही है, इसलिए उसे परेशान न करें, अन्यथा वह आबादी वाले क्षेत्र में आकर नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि पतझड़ के मौसम में वनों की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। जंगलों में आग न लगाएं और अधिक से अधिक जागरूकता फैलाएं, क्योंकि वनों की सुरक्षा से ही हमारी सुरक्षा संभव है।
उन्होंने यह भी बताया कि टुंडी के विभिन्न वन समितियों को वन विभाग द्वारा उन्नत चूल्हा और टॉर्च देकर सम्मानित किया जाएगा। मौके पर सहायक वन संरक्षक ए.के. मंजुल, सेवानिवृत्त रेंजर बिनोद ठाकुर, निजी सचिव बसंत महतो, आनंद महतो, पूर्णचंद्र महतो, मनोज राय, प्रकाश टुडू, ओम प्रकाश आनंद, शाहिद अली सहित अन्य उपस्थित थे।