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    देशभर में 6 करोड़ की साइबर ठगी का कनेक्शन धनबाद से, 7 साइबर अपराधी गिरफ्तार; नाबालिग भी शामिल

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 10:09 PM (GMT+05:30)

    धनबाद पुलिस ने देश भर में 6 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी करने वाले 7 अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। ये अपराधी गरीब ग्रामी ...और पढ़ें

    गिरफ्तार साइबर ठगों के बारे में जानकारी देते धनबाद के ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब और अन्य पुलिस पदाधिकारी। (फोटो जागरण)

    गिरफ्तार साइबर ठगों के बारे में जानकारी देते धनबाद के ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब और अन्य पुलिस पदाधिकारी। (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. धनबाद पुलिस ने 7 साइबर अपराधियों को किया गिरफ्तार।

    2. गरीब ग्रामीणों के नाम पर सिम कार्ड और खाते खोले।

    3. देश भर में 6 करोड़ से अधिक की ठगी का मामला।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। देश भर में छह करोड़ से भी अधिक की साइबर ठगी की घटना में शामिल सात साइबर अपराधियों को धनबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाबालिग भी है। पुलिस ने इन सब की गिरफ्तारी बलियापुर और पूर्वी टुंडी थाना क्षेत्र से की है।

    गिरफ्तार ठगों के पास से एक नोट बुक भी मिली है, जिसमें सीम कार्ड खरीदने वालों की सूची है। ये लोग गरीब ग्रामीणों के नाम पर सीम कार्ड खरीदते और फिर उसी सीम के आधार पर बैंक खाता खोलते थे। इस सभी सीम को साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था। जिससे अपराधी लोगों को ठगने का काम करते थे।

    गिरफ्तार आरोपितों में एक नाबालिग के अलावा पूर्वी टुंडी के मैरनवाटांड का कृष्णा कुमार दास, नवाटांड का चिरंजीत कुमार दे, कालूबथान के शीतलपुर का गोविंद बाउरी व मधुसुदन बाउरी, बलियापुर का गौरव कुमार और काजू दे उर्फ प्रतिम दे शामिल हैं। इन सभी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया और यहां से जेल भेज दिया गया।

    बिहार की सूचना पर हुई कार्रवाई

    धनबाद जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से हुई साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के मामले में अपर महानिदेशक दूरसंचार कार्यालय बिहार की सूचना पर हुई है। अपर महानिदेशक से मिली सूचना पर वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने एसडीपीओ सिंदरी प्रकाशचंद्र महतो के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया था।

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    टीम ने बिहार से मिले अपराधियों के पते पर छापामारी की और सभी को गिरफ्तार कर लिया। अपर महानिदेशक ने धनबाद पुलिस को बताया था कि एक जनवरी 2026 से लेकर 29 मई 2026 के दौरान बलियापुर चौक स्थित मोबाइल कार्नर नामक एक ही दुकान से कुल 166 सीम कार्ड बेचा गया था।

    इसमें से 57 सीम का उपयोग साइबर ठगी के लिए किया गया। यह भी आश्चर्य का मामला था कि इतने व्यापक पैमाने पर एक ही दुकानदार ने सीम बेचा।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सबसे पहले दुकानदार काजू दे उर्फ प्रतिम दे और इसके सेल्समैन गौरव कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। इस दुकान से सीम बेचे जाने से संबंधित कई दस्तावेज भी बरामद हुए।

    छह सीम से अपराधियों ने उड़ाए 60 लाख रुपये

    मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एस मोहम्मद याकूब ने बताया कि प्रारंभिक जांच में छह सीम का विस्तृत विवरण उन्हें प्राप्त हुआ है। इस छह सीम से कुल 60 लाख रुपये साइबर ठगों ने उड़ाए हैं।

    उन्होंने कहा कि अभी 51 सीम की जांच चल रही है। बिहार से जो सूचना उन्हें मिली है उसके अनुसार यह राशि करोड़ों में है। उन्होंने बताया कि इन सभी सीम के खिलाफ एनसीआरबी पोर्टल पर शिकायत दर्ज है।

    काजू दे की निशानदेही पर गिरफ्तार हुआ सरगना

    पुलिस पूछताछ में सीम विक्रेता काजू दे ने पुलिस को बताया कि सीम बेचने में उसका रिश्तेदार चिरंजित कुमार दे और मधुसुदन दे काफी मदद करते थे। चिरंजित दे बलियापुर के शीतलपुर और पूर्वी टुंडी के मायरानवाटांड के गरीब और भोले भाले ग्रामीणों के कागजात के आधार पर सीम की खरीदारी करता था।

    इस कार्य में उसकी मदद गोविंद बाउरी और मधुसुदन बाउरी करते थे। उसने ही कुल 166 सीम ग्रामीणों के नाम पर खरीदा था। पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार किया और इसके बाद इस धंधे में संलिप्त अन्य को गिरफ्तार किया गया।

    चिरंजित दे पर पहले से ही धनबाद जिला के धनसार थाना और पश्चिम बंगाल के एयरपोर्ट बिधान नगर पुलिस कमिशनरेट में साइबर ठगी से संबंधित प्राथमिकी हो रखी है। मामले की जांच में पता चला कि चिरंजित दे ही इन सभी मामले का मास्टरमाइंड है।

    सीम खरीदने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से होकर ग्राहक को गुजरना होता है। लेकिन काजू दे महज आधार कार्ड पर ही सीम की खरीद-बिक्री कर रहा था।

    1000 से 1500 में साइबर अपराधियों को बेचते थे सीम

    चिरंजित दे और इसके सहयोगी पूरी योजना के साथ ग्रामीणों के नाम पर सीम खरीदते थे। सीम चालू होने के बाद ग्रामीणों से कागजात लेकर बैंक खाता खुलवाते थे। फिर पासबुक, चेकबुक, एटीएम समेत अन्य सभी दस्तावेज और सीम अपने पास रख लेते थे।

    इसके एवज में ग्रामीणों को कुछ रुपये का भुगतान कर दिया जाता था। जबकि चिरंजित और इसका गिरोह साइबर अपराधियों से प्रति सीम 1000 से 1500 रुपये की वसूली करते थे। बैंक खाता, चेकबुक और एटीएम उपलब्ध कराने के लिए अलग से राशि लेते थे। इनका यह धंधा पिछले दो सालों से चल रहा था।

    एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 20 सीम तक बेचा

    काजू दे इस धंधे में इस तरह से रम गया था कि उसे पुलिस या गलत तरीके से सीम बेचने का कोई डर नहीं था। काजू दे ने एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 20 सीम बेचा है। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि काजू ने चार अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर क्रमश: 14, 20, 15 और 11 सीम तक बेचे हैं।

    साइबर अपराध में उपयोग हुए इन सीमों की शिकायत एनसीआरबी पोर्टल के अलावा संचार साथी और चच्छू पोर्टल भी की गई है।

    हर राज्य में की गई ठगी

    बलियापुर के मोबाइल कार्नर से बेचे गए सीम से देश के हर राज्य में साइबर अपराध की घटना को अंजाम दिया गया है। अपर महानिदेशक दूरसंचार कार्यालय पटना बिहार ने जो सूची धनबाद पुलिस को उपलब्ध कराया है उसमें उन सभी राज्यों व जिला के नाम शामिल हैं जहां बलियापुर और पूर्वी टुंडी के लोगों के नाम पर खरीदे गए सीम का उपयोग किया गया है।

    पुलिस के अनुसार देश के अधिकांश राज्यों में साइबर अपराध की घटनाओं को इन्हीं सीम के माध्यम से अंजाम दिया गया।

    पुलिस ने की अपील

    मामले की जानकारी देने के दौरान ग्रामीण एसपी याकूब ने लोगों से सचेत और जागरूक रहने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के लिए चोरी का मोबाइल फोन, फेक सीम कार्ड और म्यूल बैंक खाता की जरूरत होती है।

    गरीब ग्रामीणों को कुछ पैसों का लालच देकर अपराधी आसानी से ये तीनों चीजें प्राप्त कर लेते हैं। यदि कोई आसान तरीके से पैसा कमाने के लिए लालच देता है तो ग्रामीण उसके झांसे में नहीं आएं।

    अब पुलिस साइबर अपराध के हर कड़ी तक पहुंच रही है। ऐसे मामलों में जिसके नाम पर सीम अथवा बैंक खाता होता वे भी पुलिस की गिरफ्त में आ सकते हैं।