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धनबाद में दिवाली पर पटाखे फोड़ने से पहले जान लें ये नियम, सिर्फ 2 घंटे मिलेगी आतिशबाजी की अनुमति

Published: Sat, 24 Oct 2026 12:04 PM (IST)

झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आगामी त्योहारों के लिए पटाखों पर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें ध्वनि और वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समय-सीमा तय की गई है।

झारखंड में त्योहारों पर पटाखे जलाने के लिए नए नियम जारी। (एआई जेनरेटेड इमेज)

झारखंड में त्योहारों पर पटाखे जलाने के लिए नए नियम जारी। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. झारखंड में त्योहारों पर पटाखे जलाने के लिए नए नियम जारी।

  2. दीपावली, छठ, क्रिसमस पर पटाखे चलाने की समय-सीमा तय।

  3. नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, धनबाद। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) ने धनबाद समेत राज्य के सभी जिलों में वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश जारी किया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों का अनुपालन करते हुए प्रदूषण निवारण अधिनियम 1981 की धारा 31(ए) के तहत जारी निर्देश के अनुसार राज्य के जिन शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर अच्छा या संतोषप्रद (एक्यूआइ 1-50 और 51-100) की श्रेणी में आता है, केवल वहीं पटाखों की बिक्री की अनुमति दी जाएगी।

इसके अलावा सिर्फ उन्हीं पटाखों की बिक्री होगी जिनकी ध्वनि सीमा 125 डेसिबल से कम होगी। दीपावली एवं गुरुपर्व पर रात्रि से 10 बजे तक मात्र दो घंटे, छठ पूजा पर सुबह छह से आठ बजे तक और क्रिसमस एवं नववर्ष पर मध्य रात्रि 11:55 से मध्य रात्रि 12:30 बजे तक ही पटाखे चलाने की अनुमति होगी। हालांकि इन नियमों को कोई नहीं मानता है।

हर साल जमकर पटाखे फूटते हैं। दो घंटे की जगह पूरी रात आतिशबाजी होती है। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से दीपावली के दिन आठ नवंबर को बैंक मोड़, हीरापुर और बरटांड़ में वायु व ध्वनि प्रदूषण मापक यंत्र लगाया जाएगा।

उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई

बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 37 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, एक्यूआइ का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। 201 से 300 के बीच एक्यूआइ स्तर को पुअर की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें छोटे-छोटे धूलकण हवा में बहते हैं, जो दमा के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकते हैं और बच्चों को भी एलर्जी हो सकती है।

पिछली दिवाली धनबाद में जले 20 करोड़ के पटाखे, एक्यूआइ पहुंचा था 200 पार

पिछले वर्ष दीपावली की रात धनबाद में जमकर आतिशबाजी हुई थी। देर रात 12 बजे तक पटाखे फूटे। इस दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण का स्तर मानक से काफी अधिक हो गया था। पीएम-10 का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 215 तक पहुंच गया।

सबसे अधिक पटाखे बैंक मोड़ क्षेत्र में फोड़े गए। यहां शाम छह से रात 12 बजे तक औसत ध्वनि स्तर 91.21 डेसिबल दर्ज किया गया। रात आठ से दस बजे के बीच यहां ध्वनि का स्तर 101.4 डेसिबल तक पहुंच गया था। इसी तरह हीरापुर में ध्वनि का स्तर 86.46 डेसिबल और बरटांड़ में 81.86 डेसिबल दर्ज किया गया था।

दीपावली के अवसर पर लगभग 20 करोड़ के पटाखों की बिक्री हुई थी। जिला प्रशासन ने सिर्फ 54 व्यापारियों को ही लाइसेंस दिया था, लेकिन प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़कर जिलेभर में हजारों में पटाखा दुकानें खुली थीं।

बरटांड़ में रात 10 से 11 बजे सबसे अधिक था शोर

पिछले वर्ष बरटांड़ में प्री-दिवाली के दौरान सायं छह से रात 12 बजे तक शोर स्तर 60.5 से 73.2 डेसिबल के बीच था। दीपावली की रात (20 अक्टूबर) को यह स्तर बढ़कर 66.7 से 95.3 डेसिबल तक पहुंच गया। रात नौ से 10 बजे के बीच शोर 73.2 डेसिबल था, जबकि दीपावली के दिन यह बढ़कर 95.3 डेसिबल दर्ज किया गया।

हीरापुर क्षेत्र में प्री-दिवाली के दौरान अधिकतम औसत ध्वनि स्तर 71.6 डेसिबल था। दीपावली की रात बढ़कर 101.4 डेसिबल तक पहुंच गया। रात 10 से 11 बजे के बीच सर्वाधिक शोर दर्ज किया गया। यहां रात आठ से 11 बजे तक पटाखों के कारण लगातार 80 से 100 डेसिबल के बीच शोर स्तर बना रहा। बैंक मोड़ में 103.4 डेसिबल तक का शोर दर्ज किया गया।

प्री-दिवाली के दौरान यहां अधिकतम औसत ध्वनि स्तर 75.5 डेसिबल था, जबकि दीपावली की रात यह बढ़कर 98.2 से 103.4 डेसिबल तक पहुंच गया था। 

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