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देवघर बाबा मंदिर: महाशिवरात्रि के लिए उतारे गए पंचशूल, 14 फरवरी को पूजा के बाद फिर से होंगे स्थापित

Published: Thu, 12 Feb 2026 03:06 AM (IST)

महाशिवरात्रि के लिए देवघर बाबा मंदिर परिसर के 20 मंदिरों से पंचशूल उतारे गए हैं। बाबा भोले और पार्वती मंदिर ...और पढ़ें

मंदिर परिसर स्थित सभी मंदिरों से पंचशूल को उतारने की प्रक्रिया जारी। फोटो जागरण

मंदिर परिसर स्थित सभी मंदिरों से पंचशूल को उतारने की प्रक्रिया जारी। फोटो जागरण

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संवाद सूत्र, देवघर। महाशिवरात्रि को लेकर बाबा मंदिर प्रांगण स्थित 20 मंदिरों के शिखर से पंचशूल को उतारा गया है। वहीं शुक्रवार 13 फरवरी को बाबा भोले और पार्वती मंदिर के शिखर से उतर जाएगा। पंचशूल साफ सफाई के बाद 14 फरवरी को विधिवत सभी पंचशूलों का प्रशासनिक भवन में पूजा अर्चना की जाएगी।

बाबा मंदिर दीवान के द्वारा कपड़े में गुप्त मंत्र लिखकर पंचशूल में बांधा जाएगा इसके बाद भंडारी परिवार के सदस्यों द्वारा मंदिर के सभी शिखर पर पंचशूल लगाया जाएगा। बाबा मंदिर में परंपराओं को निभाने के लिए सभी का कार्य पहले से बंटा हुआ है।

जिसमें खासकर भंडारी परिवार का कार्य मंदिर में होने वाले दैनिक धार्मिक कार्यों के साथ-साथ परंपरागत कार्यों में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। जिसमें खासकर बाबा मंदिर के शिखर पर चढ़ने का अधिकार सिर्फ भंडारी परिवार के सदस्यों को ही है।

बाबा मंदिर के शिखर पर ध्वज बांधने का कार्य बाबा एवं माता पार्वती के शिखर पर गठबंधन बांधने का कार्य महाशिवरात्रि के अवसर पर किया जाता है। सभी मंदिरों के शिखर पर चढ़कर पंचशूल को उतारने का कार्य भंडारी परिवार के द्वारा ही किया जाता है।

वहीं महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर मोर मुकुट भी भंडारी परिवार के द्वारा ही बांधा जाता है। चार पहर पूजा में भी भंडारी परिवार के सदस्य पूजा सामग्री मंदिर के गर्भगृह में पहुंचने का कार्य करते हैं।

इस बारे में भंडारी परिवार के सदस्य शैलेश भंडारी ने बताया कि हमारे पूर्वज के समय से बाबा मंदिर में परंपरागत तरीके से कार्य किया जा रहा है। ये कार्य आज उनलोगों के द्वारा किया जा रहा है।

बाबा मंदिर कार्य उनके समाज के अन्य लोग भी जुटे हुए हैं। इस कार्य में 55 लोग सहयोग करेंगे। इस कार्य में भंडारी परिवार के चिंतामणि भंडारी, शिव शंकर भंडारी, गंगाधर भंडारी, राजू भंडारी, भोला भंडारी अभी मंदिर में कार्यरत हैं। बाबा भोले की कृपा से इसी कार्य से उनका और पूरे परिवार का भरण पोषण होता है।