आषाढ़ बीता, आस बाकी: गिद्धौर में 679 हेक्टेयर मक्का बुवाई का लक्ष्य अधूरा, अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीदें
गिद्धौर प्रखंड में अपर्याप्त वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई और धान की रोपनी धीमी है, जिससे किसान चिंतित हैं। लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे आच्छादन के ...और पढ़ें

पर्याप्त वर्षा न होने के कारण धान, मक्का एवं मोटे अनाज का आच्छादन लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है।
HighLights
अपर्याप्त वर्षा से धान और मक्का का आच्छादन लक्ष्य से पीछे।
किसान सुखाड़ घोषित करने और KCC ऋण माफी की मांग कर रहे।
संवाद सहयोगी, गिद्धौर (चतरा)। आषाढ़ माह समाप्त होने के बावजूद गिद्धौर प्रखंड में खरीफ फसलों की बुवाई और रोपनी की रफ्तार बेहद धीमी है। पर्याप्त वर्षा न होने के कारण धान, मक्का एवं मोटे अनाज का आच्छादन लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है।
खेतों में नमी के अभाव से किसान धान की रोपनी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके चेहरे पर मायूसी और चिंता साफ दिखाई दे रही है। अधिकांश खेत अब भी खाली पड़े हैं और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
लक्ष्य के मुकाबले आच्छादन नगण्य
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, खरीफ मौसम में प्रखंड के भीतर 1,940 हेक्टेयर क्षेत्र में धान तथा 679 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
हालांकि, कमजोर मानसून के चलते अब तक धान का मात्र चार प्रतिशत (4%) ही आच्छादन हो सका है। वहीं मक्का और मोटे अनाज की बुवाई भी लक्ष्य से काफी पीछे है।
सूखने लगी धान की पौध, खेतों में पड़ी दरारें
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने बताया कि समय पर बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। जिन किसानों ने कड़ी मेहनत से नर्सरी (बिचड़ा) तैयार की थी, पानी के अभाव में उनकी धान की पौध भी सूखने की कगार पर है।
कृषि अधिकारियों का मानना है कि यदि अगस्त (सावन) माह में अच्छी वर्षा होती है, तो रोपनी में कुछ तेजी आ सकती है। विभाग किसानों को वैकल्पिक फसलों पर भी ध्यान देने की सलाह दे रहा है।
सुखाड़ घोषित करने और KCC कर्ज माफी की मांग
बिगड़ती स्थिति को देखते हुए क्षेत्र के किसानों ने राज्य सरकार से गिद्धौर सहित प्रभावित इलाकों को तत्काल सुखाड़ घोषित करने की मांग की है।
इसके अलावा किसानों ने राहत के रूप में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण की एकमुश्त माफी, विशेष कृषि इनपुट सहायता, निःशुल्क बीज वितरण और सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में और विलंब हुआ, तो इस वर्ष खरीफ उत्पादन और किसानों की आजीविका पर इसका सीधा और गंभीर असर पड़ेगा।