कोनार डैम में मछुआरों के जाल में फंसीं 42 और 26 किलो की दो विशाल ब्रिकेट मछलियां, देखते रह गए लोग
Bokaro News: कोनार डैम से 42 और 26 किलो की दो विशाल ब्रिकेट मछलियां जाल में फंसीं, जिससे मछुआरे उत्साहित हो गए। ...और पढ़ें

कोनार डैम से पकड़ी गई 42 किलो की विशाल ब्रिकेट मछली के साथ मछुआरा।
HighLights
कोनार डैम में 42 और 26 किलो की विशाल मछलियां मिलीं।
जरकुंडा मत्स्यजीवी समिति के मछुआरों को यह दुर्लभ उपलब्धि मिली।
मछली पकड़ने से मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
संवाद सूत्र, स्वांग (बोकारो)। झारखंड के कोनार डैम से मंगलवार को जाल में 42 और 26 किलो वजन की दो विशाल ब्रिकेट मछलियां फंसने से मछुआरों में उत्साह का माहौल बन गया। दोनों मछलियों का आकार इतना बड़ा था कि उन्हें जलाशय से बाहर निकालने के लिए कई लोगों की मदद लेनी पड़ी।
बड़ी और भारी मछली मिलने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग डैम किनारे पहुंच गए और इस दुर्लभ नजारे को देखने के साथ फोटो भी खींची। यह उपलब्धि जरकुंडा मत्स्यजीवी सहयोग समिति के मछुआरों को मिली।
समिति के अध्यक्ष धीरज लहेरी के नेतृत्व में अशोक महतो, महावीर महतो, जमुना महतो, तापेश्वर महतो, देवेंद्र महतो समेत अन्य सदस्यों ने जाल खींचकर दोनों मछलियों को सुरक्षित बाहर निकाला। समिति अध्यक्ष धीरज लहेरी ने बताया कि कोनार जलाशय में कई प्रजातियों की बड़ी मछलियां मिलती हैं, लेकिन 42 किलो जैसी विशाल मछली का मिलना बेहद दुर्लभ है।
उन्होंने बताया कि बड़ी मछली मिलने से मछुआरों को अच्छी आमदनी होती है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। स्थानीय मछुआरों ने बताया कि कोनार डैम उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। यहां केज कल्चर के माध्यम से बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन किया जाता है।
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उन्होंने आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे मत्स्य उत्पादन और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।