'दिल्ली में 'कश्मीर मॉडल' लागू’, इंटरनेट बैन पर उमर का तीखा तंज, बोले- नए जम्मू-कश्मीर जैसी नई दिल्ली में स्वागत है
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने इसे 'कश्मीर ...और पढ़ें

दिल्ली में इंटरनेट बंदी पर उमर ने केंद्र को घेरा (फाइल फोटो)
HighLights
दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया।
उमर अब्दुल्ला ने इसे "कश्मीर मॉडल" करार दिया।
यह प्रतिबंध प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले लगाए गए।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने वाला 'कश्मीर माडल' अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी को जम्मू-कश्मीर में बीते वर्षों के दौरान अपनाई गई व्यवस्था से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया।
इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर उमर अब्दुल्ला ने लिखा, 'कश्मीर माडल को दिल्ली में लागू कर दिया गया है। नए जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर बने नए नई दिल्ली में आपका स्वागत है।' उनकी यह टिप्पणी प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के बाद आई है।

मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का आदेश
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के चार किलोमीटर के दायरे में नौ अक्टूबर की रात दस बजे से दस अक्टूबर की रात दस बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का आदेश जारी किया है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत जारी इस आदेश में सभी मोबाइल इंटरनेट तकनीकों को शामिल किया गया है।
यह कदम जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उठाया गया है। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात प्रभावित होने की आशंका का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
राजधानी में 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती
सुरक्षा व्यवस्था के तहत राजधानी में 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, सात स्तरों की बैरिकेडिंग और 300 से अधिक निगरानी कैमरे लगाने की व्यवस्था की गई है।
ऐसे में उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी ने इंटरनेट प्रतिबंधों और सुरक्षा के नाम पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
