जम्मू-कश्मीर: मानसबल झील का पानी नहाने लायक भी नहीं! 60000 लोगों की सेहत पर खतरा, CPCB की रिपोर्ट ने चौंकाया
Manasbal Lake: CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की मानसबल झील का पानी अत्यधिक प्रदूषित है और नहाने लायक भी नहीं है। इससे 60,000 लोगों के स्वास् ...और पढ़ें

मानसबल झील का पानी खतरनाक स्तर पर प्रदूषित।
HighLights
मानसबल झील का पानी नहाने लायक भी नहीं।
60,000 लोगों की सेहत पर मंडराया गंभीर खतरा।
बिना साफ किया सीवेज प्रदूषण का मुख्य कारण।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल ज़िले में मौजूद मशहूर मीठे पानी की झील मानसबल में प्रदूषण का स्तर बहुत ज़्यादा है। इससे लोगों की सेहत को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।बता दें कि यह झील गांदरबल और बांदीपोरा ज़िलों के निवासियों के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत है।
CPCB की हालिया जांच से पता चलता है कि झील मल-मूत्र, बिना साफ़ किए गए सीवेज और ठोस कचरे से बुरी तरह दूषित हो गई है। एनवायरमेंटल एक्टिविस्ट राजा मुज़फ़्फ़र भट की याचिका के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने CPCB को पानी की गुणवत्ता की जांच करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद CPCB ने अप्रैल में ये जांच की।
क्या है याचिकाकर्ता का आरोप
याचिकाकर्ता का आरोप था कि 14 गांवों से कीटनाशकों समेत बिना साफ़ किया गया सीवेज लार नहर के ज़रिए मानसबल झील में मिल रहा है, जिससे झील का इकोसिस्टम खराब हो रहा है। NGT ने इस साल जनवरी में CPCB को ये जांच करने का आदेश दिया था।
पानी नहाने के लिए भी ठीक नहीं
CPCB की रिपोर्ट से इकोसिस्टम के बिगड़ने और स्थानीय लोगों की सेहत को संभावित खतरों की गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट से पता चलता है कि झील के पानी की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर है। पानी के जो सात सैंपल लिए गए, उनमें से कोई भी 'क्लास B' के मानकों पर खरा नहीं उतरा। इससे पता चलता है कि पानी नहाने के लिए भी ठीक नहीं है।
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पानी सिर्फ़ जंगली जानवरों-मछली पालन के लिए ठीक
सात सैंपल में से चार मानसबल झील से, दो प्राकृतिक झरनों से और एक लार नहर से लिया गया था। रिपोर्ट में टेस्ट की गई सात जगहों में से पांच को 'क्लास D' में रखा गया है, जिसका मतलब है कि पानी सिर्फ़ जंगली जानवरों और मछली पालन के लिए ही ठीक है। सिर्फ़ एक झरने का पानी 'क्लास C' के स्टैंडर्ड (ट्रीटमेंट के बाद पीने लायक पानी) पर खरा उतरा, जबकि एक और झरना 'क्लास A-D' के बेसिक क्वालिटी स्टैंडर्ड पर भी खरा नहीं उतर पाया।
टेस्ट में फेकल और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का लेवल ज़्यादा पाया गया, जो इंसानी और जानवरों के सीवेज से होने वाले प्रदूषण का संकेत है। इस वजह से यह पानी सीधे पीने के लिए सुरक्षित नहीं है। हालांकि, ज़्यादातर भारी धातुएं पता लगाने लायक सीमा से कम पाई गईं। CPCB ने पाया कि घरों का गंदा पानी सीधे झील में गिर रहा है, साथ ही म्युनिसिपल कचरा और प्लास्टिक भी किनारों पर, खासकर कोंडाबल इलाके के पास, खुले में फेंका जा रहा है।
क्या है प्रदूषण की मुख्य वजह
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण की मुख्य वजह बिना ट्रीट किए कचरे का बेरोकटोक बहाव है। आस-पास के सात गांवों का गंदा पानी लार नहर के ज़रिए झील में आता है, जो बिना किसी ट्रीटमेंट या फ़िल्टरेशन के झील में गिरता है। भट ने इसे अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही बताया। उन्होंने दावा किया कि सफापोरा के लोग सालों से पानी की खराब होती क्वालिटी के बारे में चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन उनकी चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया गया है।
भट ने कहा, 'सरकार ने दावा किया था कि झील को बचाने के लिए एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)बनाया जा रहा है, लेकिन वह कभी नहीं बना। यह अधिकारियों की लापरवाही है, क्योंकि 50,000 से 60,000 लोगों को पीने के लिए यही दूषित पानी सप्लाई किया जाता है।